शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2021

सरकार ने मोटरयान अधिनियम में किया बड़ा बदलाव, एंबुलेंस को साइड नहीं दिया तो लगेगा इतने हजार का जुर्माना…

 रायपुर, 29 अक्टूबर 2021। सरकार ने मोटरयान अधिनियम में बड़ा बदलाव कर दिया है। ट्रैफिक नियम तोड़ने पर अब भारी जुर्माना देना पड़ेगा।



बिना हेलमेट गाड़ी चलाने पर 500 रुपए का जुर्माना देना होगा। तेज रफ्तार गाड़ी चलाने पर हजार रुपए का जुर्माना तय किया गया है।


बिना सीट बेल्ट और अतिरिक्त सवारी बैठाने पर भी हजार रुपए का जुर्माना लगेगा। तेज रफ्तार गाड़ी चलाते हुए दूसरी बार पकड़े जाने पर दो हजार का जुर्माना देना होगा। एंबुलेंस को साइड नहीं देने पर 5 हजार का फाइन लगेगा।


इन अपराधों में भी बढ़ा जुर्माना


राज्य में अनुमति से अधिक भार ढोने पर पकड़े जाने पर पहली बार में दस हजार रुपए। दो हजार प्रति टन देना होगा।

कामर्शियल ड्राइवर परिवहन विभाग के रोकने और वाहन का भार कराने से इनकार करता है, तो उसे 20-20 हजार भरने होंगे।

सवारी गाड़ियों में तय से अधिक यात्रियों को बिठाने पर पहली व दूसरी बार में 100-100 रुपए प्रति सवारी जुर्माना होगा।

सीट बेल्ट नहीं बांधने पर 500 व दूसरी बार में हजार रुपए देने होंगे।

केंद्र ने पहली बार के लिए एक हजार जुर्माना तय किया है।

4 साल से कम उम्र का बालक बैठा हो तो तय गति सीमा पर गाड़ी नहीं चलाने पर 500-1000 रुपए जुर्माना देना होगा।

बाइक चालकों और पिछली सवारियों के लिए सुरक्षा उपायों के उल्लंघन पर पहली व दूसरी बार में 500-500 रुपए देने होंगे।

गुरुवार, 28 अक्टूबर 2021

शनिवार, 23 अक्टूबर 2021

साइबर क्राइम पर लगेगा ब्रेक, जागरूकता लाने कार्यशाला का किया आयोजन, अगर आप भी ठगी का शिकार हुए हैं, तो इस वेबसाइट में करें शिकायत…


साइबर क्राइम पर लगेगा ब्रेक, जागरूकता लाने कार्यशाला का किया आयोजन, अगर आप भी ठगी का शिकार हुए हैं, तो इस वेबसाइट में करें शिकायत


रायपुर, 23 2021ब्लॉग साइट पर समाचार प्रकाशित किया गया था। बातचीत में बातचीत के दौरान बातचीत होती रही। इस समस्या को हल करने के लिए यह गलत है।

वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर ऐसा करने पर कार्रवाई होगी। बैंक खाते में जाने से पहले. जुलाई को 11 से 12 बजे तक  

इस तरह के पोस्ट को विशेष रूप से पसंद किया जाता है। माइट आँकड़ों के लिए बार-बार चालू होने के बाद इसे दोबारा चालू किया गया था, इस बार चालू होने के बाद ही यह बार-बार चालू होगा।

कभी भी गलत होने की स्थिति में होने पर, आपके खाते में गड़बड़ी होने पर यह आपके खाते में गड़बड़ी की स्थिति में बदल जाएगा। जनता को सचेत करना है, कोई भी 155260 पर संपर्क कर सकते हैं।

अलावा इसके www.cybercrime.gov.in पोर्टल का उपयोग कर हम अपराधी के बैंक अकाउंट में जाने से पहले रोक सकते हैं, लेकिन ये कार्रवाई तत्काल करनी होगी। ट्वाइकिल के बारे में. भविष्य के लिए हर स्कूल को अलर्ट किया गया है।  

शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2021

Ravindra niti

 लोग 2000 तक इन्वेस्टमेंट nhi कर पाते और लखपति बनने का सपने देखते है रविंद्र नीति 001

Rituraj niti

लोग अमीर क्यों नहीं बनते इसका मुख्य कारण इन्वेस्टमेंट न कर पाना है।
Rituraj niti 1053

सोमवार, 18 अक्टूबर 2021

Gender Equality in #India :

 Gender Equality in #India :


1)No Domestic violence law for men. 

2)No Sexual harassment law for men.

3)No Rape law for men.

4)No Stalking law for men.

5)No Punishment for Adulterous wife till September 2018.

6)No Gender Neutral marriage age. 

7)No Article 15(3) for men. ⬇️⬇️


8)verbal statement of men, not counted as evidence.

9)just 500₹ fine for false accuser female criminals.

10)no free ride for men in metro

11)no reserved seat or less seats for men in buses. 

12)no reserved bogies in train for men. 

13)promise to marriage is rape.

14)No Men commission.

15)No Modesty(IPC 509) law for Men.

16)No punishment for Dowry giving Female criminals.(in practice)

17)No law to protect from an assault against Modesty (IPC 354) for Men.

18)No Disrobe (IPC 354B) law for Men.

19)No punishment for Females making Sexually Coloured Remarks to Men.(IPC 354A).

20)No punishment for Females demanding/requesting sexual favors from Men(IPC 354A).

21) Presumption of Rape in the Absence of Evidence in certain prosecutions.(Indian Evidence Act 114A).

#India

22) No law to Protect the Identity,Dignity & Integrity of Men accused of sexual offences till completion of probe.

23) Father is Forced/liable to Pay Maintenance for Daughters after 18, till she gets married.But not for Sons(major)

24)No Voyeurism law for Men (IPC 354C)

#India

25)No punishment for Females who marry minor boys.

26)No Access for men in public places like women only trains, buses, boogies etc.

This implies that men are potential molesters & rapists.

#India

27)Majority or 90% of Child custody is given to mother's overlooking the pain & 'Fundamental Right to Parent' of Father's.

28)Jobless husband/son have to pay alimony/maintenance But jobless wife/daughter is considered incapable to do the same (sec 125 crpc).

शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2021

बड़ी खबर : 10वीं और 12वीं बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए अंतिम अवसर, इस तारीख तक भर सकेंगे परीक्षा फॉर्म….



रायपुर, 13 अक्टूबर 2021। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा वर्ष 2021-22 में हाईस्कूल और हायर सेकण्डरी मुख्य परीक्षा के लिए नियमित विद्यार्थियों को परीक्षा आवेदन भरने का अंतिम अवसर प्रदान किया गया है। छात्र 550 रूपए विलंब शुल्क के साथ 20 अक्टूबर तक परीक्षा का आवेदन भर सकते हैं।

माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा हाईस्कूल और हायर सेकण्डरी मुख्य परीक्षा वर्ष 2021-22 के लिए नियमित विद्यार्थियों के परीक्षा आवेदन भरने के लिए 15 सितम्बर तक की तिथि निर्धारित की गई थी। उसके बाद परीक्षा आवेदन भरने के लिए 22 सितम्बर तक की समय-अवधि बढ़ाई गई थी। कुछ छात्रों द्वारा निर्धारित तिथि तक फार्म नहीं भरे जा सके हैं।

छात्र हित को ध्यान में रखते हुए हाईस्कूल एवं हायर सेकण्डरी मुख्य परीक्षा वर्ष 2021-22 के लिए विलंब शुल्क 550 रूपए के साथ 20 अक्टूबर तक परीक्षा का आवेदन भरने की अनुमति प्रदान की गई है, जो छात्र इस परीक्षा में सम्मिलित होना चाहते हैं, वे निर्धारित तिथि तक अपने स्कूल के माध्यम से आवश्यक रूप से आवेदन कर दें। माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव प्रो. व्ही.के. गोयल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि निर्धारित तिथि के पश्चात किसी भी प्रकार से आवेदन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।


बुधवार, 13 अक्टूबर 2021

Case study

 1. 19 जुलाई, 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए को कानूनी आतंकवाद की संज्ञा दी। 

2. 11 जून, 2010 सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के सम्बन्ध में कहा कि पतियों को अपनी स्वतंत्रता को भूल जाना चाहिये।

3. 14 अगस्त, 2010 सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए में संशोधन करने के लिए कहा।

4. 04 फरवरी, 2010 पंजाब के अम्बाला कोर्ट ने स्वीकार कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के प्रावधानों का दुरूपयोग हो रहा है।

5. 16 अप्रेल, 2010 बॉम्बे हाई कोर्ट ने और 22 अगस्त, 2010 को बैंगलौर हाई कोर्ट ने भी भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के दुरूपयोग की बात को स्वीकारा।

6. केवल यही नहीं, बल्कि 22 अगस्त, 2010 को केन्दीय सरकार ने सभी प्रदेश सरकारों की पुलिस को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के प्रावधानों के दुरुपयोग के बारे में चेतावनी दी।

7. विधि आयोग ने अपनी 154 वीं रिपोर्ट में इस बात को साफ शब्दों में स्वीकारा कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए के प्रावधानों का दुरुपयोग हो रहा है।

8. नवम्बर, 2012 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश द्वय टीएस ठाकुर और ज्ञानसुधा मिश्रा की बेंच ने कहा कि धारा 498-ए के आरोप में केवल एफआईआर में नाम लिखवा देने मात्र के आधार पर ही पति-पक्ष के लोगों के विरुद्ध धारा-498-ए के तहत मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिये।

उपरोक्त गंभीर विचारों के होते हुए भी धारा 498-ए भारतीय दंड संहिता में कायम है इसका दुरुपयोग भी लगातार जारी रहा है। जिसको लेकर देश की सर्वोच्च अदालत अर्थात् सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 02 जुलाई, 2014 को एक बार फिर से अनेक गम्भीर मानी जा रही टिप्पणियों के साथ अपना निर्णय सुनाया है। न्यायमूर्ति चंद्रमौलि कुमार प्रसाद की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने अपने निर्णय में मूल रूप से निम्न बातें कही हैं:-

1. दहेज उत्पीड़न विरोधी धारा 498-ए का पत्नियों द्वारा जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है।

2. धारा 498-क में वर्णित अपराध के संज्ञेय और गैर जमानती होने के कारण असंतुष्ट पत्नियां इसे अपने कवच की बजाय अपने पतियों के विरुद्ध हथियार के रूप में इस्तेमाल करती हैं।

3. धारा 498-क के तहत गिरफ्तारी व्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित करने के साथ-साथ, गिरफ्तार व्यक्ति को अपमानित भी करती है और हमेशा के लिए उस पर धब्बा लगाती है।

4. धारा 498-ए वर पक्ष के लोगों को परेशान करने का सबसे आसान तरीका है। पति और उसके रिश्तेदारों को इस प्रावधान के तहत गिरफ्तार कराना बहुत आसान है। अनेक मामलों में पति के अशक्त दादा-दादी, विदेश में दशकों से रहने वाली उनकी बहनों तक को भी गिरफ्तार किया गया है।

5. धारा 498-ए के इस प्रावधान के तहत गिरफ्तार व्यक्तियों में से करीब एक चौथाई पतियों की मां और बहन जैसी महिलायें होती हैं, जिन्हें गिरफ्तारी के जाल में लिया जाता है।

6. धारा 498-ए के मामलों में आरोप पत्र दाखिल करने की दर 93.6 फीसदी तक है, जबकि सजा दिलाने की दर सिर्फ 15 फीसदी है।

7. हाल के दिनों में वैवाहिक विवादों में इजाफा हुआ है। जिससे शादी जैसी संस्था प्रभावित हो रही है।

उपरोक्त कारणों से सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि धारा 498-ए के दुरुपयोग को रोकने के लिये हम सभी राज्य सरकारों को निम्न निर्देश देते हैं :-

(सुप्रीम कोर्ट के प्रत्येक निर्देश के सम्बन्ध में इस आलेख के लेखक द्वारा टिप्पणियॉं भी दी गयी हैं।)

1. देश में पुलिस अभी तक ब्रितानी सोच से बाहर नहीं निकली है और गिरफ्तार करने का अधिकार बेहद आकर्षक है। पहले गिरफ्तारी और फिर बाकी कार्यवाही करने का रवैया निन्दनीय है, जिस पर अंकुश लगाना चाहिए। पुलिस अधिकारी के पास तुरंत गिरफ्तारी की शक्ति को भ्रष्टाचार का बड़ा स्रोत है।

झूठ और सच सब जानते है फिर भी झूठ का झंडा ही बुलंद है

सोमवार, 4 अक्टूबर 2021

यहां COVID-19 प्रभावित छात्रों के लिए छात्रवृत्ति का अवसर है!

 यहां COVID-19 प्रभावित छात्रों के लिए छात्रवृत्ति का अवसर है!


 *एसबीआई जनरल सुरक्षा सहायता छात्रवृत्ति कार्यक्रम 2021*


 COVID-19 प्रभावित छात्रों को उनकी शिक्षा पूरी करने के लिए आर्थिक रूप से सहायता करने के लिए SBI जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की एक पहल।

 *पात्रता:* _कक्षा 9 से 12 तक के छात्र, और स्नातक (सामान्य और व्यावसायिक) पाठ्यक्रम जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है या जिनके परिवार के कमाने वाले सदस्यों ने COVID-19 महामारी के दौरान अपना रोजगार (या आजीविका) खो दिया है_

 *पुरस्कार:* _छात्रवृत्ति INR 29,500 से INR 38,500 प्रति वर्ष तक_

 *आवेदन की समय सीमा:* _31 अक्टूबर, 2021_

 *आवेदन URL:* www.b4s.in/a/SBIG1


 _किसी ऐसे व्यक्ति को जानें जिसे इस छात्रवृत्ति की आवश्यकता है? इस संदेश को साझा करें और उनके शैक्षणिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में उनकी मदद करें। *साझा करना ही देखभाल है।*_


 किसी भी अन्य प्रश्न के लिए, बेझिझक sbigeneralscholarship@buddy4study.com पर ईमेल करें या 011-430-92248 (Ext-266) पर कॉल करें।


*SBI General Insurance*

Suraksha and Bharosa Dono