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रविवार, 8 मार्च 2026

* सूचना आयोग में द्वितीय अपील या शिकायत का लंबे अरसे तक निराकरण न होने पर यह करें

* सूचना आयोग में द्वितीय अपील या शिकायत का लंबे अरसे तक निराकरण न होने पर यह करें -

 सूचना आयोग को पत्र लिख कर आपके प्रकरण का जल्दी निपटारा करने का अनुरोध करें ।
 ऐसा लिखित और मौखिक अनुरोध संबंधित सूचना आयुक्त से मिल कर करेंगे तो ज्यादा प्रभावी होगा।

सूचना आयुक्त के नाते हमने ऐसे अनुरोध मिलने पर द्वितीय अपीलों का 1 से 3 महीने के भीतर निपटारा किया है।

इसके अलावा सूचना आयोग के लोक सूचना अधिकारी के नाम आरटीआई लगा कर आपकी द्वितीय अपील पंजीयन क्रमांक...पर अभी तक आयोग द्वारा की गई कार्यवाही की प्रमाणित जानकारी मांग सकते हैं।
     इससे आपकी केस फाइल संबंधित सूचना आयुक्त के संज्ञान में आ जाएगी और जल्दी निपटारे के आसार बन जाएंगे।

गुरुवार, 5 मार्च 2026

अपनी शिकायत पर की गई कार्यवाही की जानकारी पाने का अधिकार है शिकायतकर्ता को

🔅अपनी शिकायत पर की गई कार्यवाही की जानकारी पाने का अधिकार है शिकायतकर्ता को🔅

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत कोई भी शिकायतकर्ता अपनी शिकायत पर हुई प्रगति या कार्यवाही की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकता है।
     ​इसका पूरा तरीका और आवेदन का प्रारूप -
​1. आवेदन कहाँ करें ?
​आपको उसी विभाग के लोक सूचना अधिकारी (PIO/APIO) को आवेदन देना होगा, जहाँ आपने अपनी शिकायत दर्ज कराई थी।

​2. आवेदन में क्या लिखें ? 
​अपनी आरटीआई में निम्न विशिष्ट जानकारी मांगें, ताकि विभाग गोल-मोल जवाब न दे सके -

• ​शिकायत का विवरण : आरटीआई के साथ अपनी शिकायत की छाया प्रति और उसे प्रस्तुत करने का प्रमाण संलग्न करें ।
अपनी शिकायत की तारीख, पावती संख्या (Receipt/Diary Number) और विषय का स्पष्ट उल्लेख करें।
• ​दैनिक प्रगति (Daily Progress) :  
आपकी शिकायत पर अभी तक जिस जिस अधिकारी ने जिस जिस तिथि पर जो जो कार्यवाही की, उसकी प्रमाणित प्रति मांगे।
•✓​संबंधित दस्तावेज : 
शिकायत से संबंधित जांच रिपोर्ट (Inquiry Report), अधिकारियों की टिप्पणियां (File Notings) और शिकायत पर लिए गए अंतिम निर्णय की प्रमाणित प्रति मांगें।
• ​देरी का कारण :
यदि निर्धारित समय सीमा में कार्यवाही नहीं हुई है, तो उन अधिकारियों के नाम और पद की जानकारी मांगे, जो इसके लिए जिम्मेदार हैं।
• ​नियमों की प्रति : 
उस नियम या चार्टर की प्रति मांगें, जिसके तहत आपकी शिकायत का निपटारा किया जाना चाहिए था।

​3. आरटीआई आवेदन का प्रारूप (Draft) -
​सेवा में,
लोक सूचना अधिकारी,
(विभाग का नाम और पता यहां लिखें)
​विषय : सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत सूचना हेतु आवेदन।
​महोदय,
मैंने दिनांक [तारीख लिखें] को एक शिकायत दर्ज की थी, जिसका विवरण निम्न है :
​शिकायत का विषय: ........................
​पावती/डायरी संख्या: ........................
शिकायत की छाया प्रति भी संलग्न है। 
​अतः मुझे उक्त शिकायत के संबंध में निम्न जानकारी प्रमाणित प्रतियों में उपलब्ध कराएं -
1-​ मेरी शिकायत पर अब तक की गई कार्यवाही की दैनिक प्रगति रिपोर्ट (Daily Progress Report) प्रदान करें।
2-​ मेरी शिकायत जिस-जिस अधिकारी के पास गई, उनके पास वह जितने समय तक रही और उन्होंने उस पर जो-जो टिप्पणी (File Notings) की, इन सबकी जानकारी देने का कष्ट करें।
3-​ यदि इस शिकायत की कोई जांच (Investigation) की गई है, तो जांच रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति प्रदान करें।
4- ​यदि शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है, तो संबंधित दोषी अधिकारियों के नाम और पद बताएं जिन पर कार्यवाही न करने के लिए जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
5-​ विभागीय नियमों के अनुसार, इस प्रकार की शिकायत के निवारण के लिए निर्धारित अवधि और संबंधित संबंधित नियम की प्रति दें।
​संलग्नक:
​१० रुपये का शुल्क (Postel Order/Cash/Online).
​शिकायत की पावती (Receipt) की फोटोकॉपी।
​भवदीय,
(आपका नाम, हस्ताक्षर और पूरा पता)
(मोबाइल नंबर)

​4. काम की बातें -
 • केंद्र और सभी राज्यों व केंद्र शासित क्षेत्रों में सूचना के आवेदन के साथ ₹10 का शुल्क संलग्न करना होता है।     

BPL कार्ड धारकों को यह शुल्क नहीं देना होता है, बशर्ते कि वे अपनी आरटीआई के साथ अपने बीपीएल होने का सत्यापित प्रणाम संलग्न करें।

• ​समय सीमा : 
लोक सूचना अधिकारी के लिए यह अनिवार्य है कि वह सूचना का आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर आवेदन का निराकरण कर आवेदक को सूचित करे।

* ​प्रथम अपील : 
यदि लोक सूचना अधिकारी से 30 दिनों के भीतर आवेदन का कोई जवाब आवेदक को न मिले, या जानकारी अधूरी या गलत या अस्पष्ट मिले तो आवेदक अगले 30 दिनों के भीतर उसी विभाग के प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील कर सकता है।  

* प्रथम अपीलीय अधिकारी के लिए यह अनिवार्य है कि वे प्रथम अपील प्राप्त होने की तिथि से 30 दिन के भीतर उसका निराकरण करें। 
अपीलीय अधिकारी द्वारा ऐसा नहीं किए जाने पर या गलत आदेश पारित किए जाने पर अपीलार्थी अगले 90 दिनों के भीतर सूचना आयोग में द्वितीय अपील कर सकते हैं। 
यह अंतिम अपील होती है।

रविवार, 1 मार्च 2026

⚜️ सिर्फ एफआईआर लंबित होने पर किसी के पासपोर्ट को सीमित या रद्द नहीं किया जा सकता ; पासपोर्ट रखना और विदेश यात्रा करना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अभिन्न भाग : हाई कोर्ट ⚜️

⚜️ सिर्फ एफआईआर लंबित होने पर किसी के पासपोर्ट को सीमित या रद्द नहीं किया जा सकता ; पासपोर्ट रखना और विदेश यात्रा करना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अभिन्न भाग : हाई कोर्ट  ⚜️

दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल में  एक महत्वपूर्ण फैसले में दोहराया है कि पासपोर्ट रखना और विदेश यात्रा करना संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21) के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
​जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव (Justice Purushaindra Kumar Kaurav) की पीठ ने
​ योगेश रहेजा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (Yogesh Raheja v. Union of India) के केस में सुरक्षित रखे गए इस निर्णय को
​27 फरवरी 2026 को सार्वजनिक किया है।
​        कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें रहेजा डेवलपर्स के पूर्व निदेशक का पासपोर्ट इस आधार पर जब्त (Impound) कर लिया गया था कि उन्होंने पासपोर्ट रिन्यूअल के समय अपने खिलाफ लंबित एक FIR की जानकारी नहीं दी थी।
​हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट रखना केवल एक सरकारी सुविधा नहीं, बल्कि एक मौलिक अधिकार है जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार (Article 21) के अंतर्गत आता है।
​राज्य (अर्थात सरकार) की कोई भी कार्रवाई, जो पासपोर्ट रखने के अधिकार को प्रभावित करती है, 
उसे 'तर्कसंगत' (Reasonable) होना चाहिए और 'प्राकृतिक न्याय' (Natural Justice) के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए।
​                                     कोर्ट ने पाया कि केवल FIR दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि आपराधिक कार्यवाही "लंबित" है। 
जब तक किसी सक्षम न्यायालय द्वारा अपराध का संज्ञान (Cognizance) नहीं लिया जाता, तब तक उसे पासपोर्ट रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
​प्रशासनिक अधिकारियों को पासपोर्ट जब्त करने जैसे कदम उठाने से पहले व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर देना चाहिए।
​याचिकाकर्ता योगेश रहेजा ने अक्टूबर 2024 में पासपोर्ट रिन्यूअल के लिए आवेदन किया था। प्रशासनिक अधिकारियों ने 17 जनवरी 2025 को उनका पासपोर्ट इस आधार पर जब्त कर लिया कि उन्होंने 2018 की एक FIR का खुलासा नहीं किया था। कोर्ट ने नोट किया कि उस मामले में कोर्ट ने संज्ञान (Cognizance) फरवरी 2025 में लिया था, यानी जब पासपोर्ट जब्त किया गया, तब तकनीकी रूप से मामला अदालत में लंबित नहीं था।

     दिल्ली उच्च न्यायालय ने जोर देकर कहा कि पासपोर्ट से संबंधित कोई भी कार्रवाई उचित, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का अनुरूप और निजी स्वतंत्रता का उल्लंघन न करने वाली होनी चाहिए। सिर्फ एफआईआर लंबित होने पर पासपोर्ट सीमित या रद्द नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने इस आधार पर केंद्र के प्रशासनिक अधिकारियों का आदेश रद्द कर दिया।

Rti प्रश्न वाचक उत्तर

<> आरटीआई में प्रश्नवाचक जानकारी के बारे में भाई सरीन की उपयोगी पोस्ट <> 

जन सूचना अधिकारी (PIO) का यह तर्क कि "प्रश्न पूछना सूचना के अधिकार के दायरे में नहीं आता," अक्सर भ्रामक होता है। आरटीआई कानून की पेचीदगियों को समझ कर आप इसका प्रभावी उत्तर दे सकते हैं।
यहाँ विस्तृत मार्गदर्शन और समाधान की प्रक्रिया दी गई है:
1. कानून क्या कहता है? (धारा 2(f) की व्याख्या):
आरटीआई अधिनियम की धारा 2(f) के अनुसार, "सूचना" का अर्थ है किसी भी रूप में उपलब्ध सामग्री, जिसमें रिकॉर्ड, दस्तावेज, मेमो, ई-मेल, राय, सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, आदेश, लॉगबुक, अनुबंध, रिपोर्ट, नमूने और मॉडल शामिल हैं।
 * सच्चाई: यह सही है कि आप पीआईओ से "क्यों" या "कैसे" जैसे दार्शनिक प्रश्न नहीं पूछ सकते, जिनका उत्तर सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद न हो।
 * अधिकार: लेकिन, यदि आपके प्रश्न का उत्तर किसी दस्तावेज, पंजिका (Register) या फाइल नोटिंग में दर्ज है, तो उसे देना अधिकारी का दायित्व है।
2. केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) का रुख
अनेक फैसलों में CIC ने स्पष्ट किया है कि केवल "प्रश्नवाचक चिन्ह" होने के कारण आवेदन को खारिज नहीं किया जा सकता। यदि नागरिक ने पूछा है कि "अमुक कार्य क्यों नहीं हुआ?", तो विभाग को उस कार्य से संबंधित फाइल नोटिंग की कॉपी देनी चाहिए, जिससे स्पष्ट हो सके कि निर्णय क्या लिया गया था।
3. आपका अगला कदम: प्रथम अपील (First Appeal)
चूंकि आपका आवेदन अमान्य कर दिया गया है, आपको 30 दिनों के भीतर प्रथम अपीलीय अधिकारी (FAA) के समक्ष अपील करनी चाहिए। अपनी अपील में निम्न तर्क लिखें:
 * अभिलेखों की मांग: लिखें कि "मैंने जो जानकारी मांगी है, वह विभाग के रिकॉर्ड का हिस्सा है। यदि पीआईओ को लगता है कि यह 'प्रश्न' है, तो उन्हें संबंधित नियम/दस्तावेज/फाइल नोटिंग की प्रति उपलब्ध करानी चाहिए थी, न कि आवेदन निरस्त करना चाहिए था।"
 * धारा 7(1) का उल्लंघन: तर्क दें कि पीआईओ ने बिना किसी ठोस कानूनी आधार के सूचना देने से मना किया है।
 * मार्गदर्शन का अभाव: पीआईओ का कर्तव्य है कि यदि आवेदन स्पष्ट नहीं है, तो वह आवेदक की सहायता करे (धारा 5(3)), न कि उसे सीधे अमान्य कर दे।
4. आवेदन लिखने का सही तरीका (भविष्य के लिए)
आगे से सूचना मांगते समय भाषा को थोड़ा बदलें ताकि अधिकारी को बहाना न मिले:
| गलत तरीका (प्रश्न पूछना) | सही तरीका (दस्तावेज मांगना) |

 "मेरी सड़क अभी तक क्यों नहीं बनी?" इस प्रश्न की बजाय यह मांग करें-
 "सड़क निर्माण से संबंधित प्रगति रिपोर्ट और देरी के कारणों वाली फाइल नोटिंग की प्रमाणित प्रति दें।" |
| "अधिकारी समय पर दफ्तर क्यों नहीं आते?" इस प्रश्न की जगह यह मांग करें -
 "पिछले एक माह की उपस्थिति पंजिका (Attendance Register) की प्रमाणित छायाप्रति दें।" |
निष्कर्ष :
पीआईओ द्वारा आपके आवेदन को केवल "प्रश्न" कहकर खारिज करना गलत है। आप तुरंत प्रथम अपील दायर करें और उसमें स्पष्ट करें कि मांगी गई जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध है, अतः वह धारा 2(f) के तहत 'सूचना' की श्रेणी में आती है।

शुक्रवार, 24 नवंबर 2023

जरूरी सवाल! RTI Act की कौन सी धाराएं हमारे काम की हैं?

 1. धारा (6)1-    RTI एप्लीकेशन लिखने का अधिकार

2. धारा (6) 3-   अगर एप्लीकेशन गलत विभाग में चली गई है तो वह विभाग इस धारा के तहत सही डिपार्टमेंट को आपका आवेदन भेजेगा. वह भी महज 5 दिन में.

3. धारा (7)5-    इस धारा के अनुसार BPL कार्ड वालों को RTI फाइल करते समय कोई फीस नहीं देना होती.

4. धारा (7)6-    अगर आपकी RTI एप्लीकेशन का जवाब 30 दिन में नहीं आता है, तो सरकार आपको फ्री में सूचना देगी.

5. धारा 18-       अगर किसी अधिकारी से जवाब नहीं आता, तो उसकी शिकायत आप सूचना अधिकारी से कर सकते हैं.

6. धारा 8-         RTI में आपको ऐसी सूचना नहीं मिलेगी, जिससे देश की अखंडता या सुरक्षा खतरे में आ सकती है. साथ ही, किसी विभाग की आंतरिक जांच पर प्रभाव पड़े, ऐसा सूचना भी आपको नहीं दी जाएगी. 

7. धारा (19)1- अगर सरकारी विभाग की तरफ से 30 दिन में आपको जवाब नहीं मिलता है तो इस धारा के तहत आप प्रथम अपील अधिकारी को प्रथम अपील कर सकते हैं.

8. धारा (19)3- अगर आपकी प्रथम अपील का भी जवाब नहीं आता है तो आप इस धारा की मदद से 90 दिन के अंदर दूसरी अपील अधिकारी को अपील कर सकते हैं.

रविवार, 23 अगस्त 2020

केंद्रीय सूचना आयोग में पदस्थापित सूचना आयुक्त भ्रष्ट, कदाचारी, अकर्मण्य, अनियमिततापूर्ण कार्य करने वाले और पदों का दुरुपयोग

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केंद्रीय सूचना आयोग में पदस्थापित सूचना आयुक्त

भ्रष्ट, कदाचारी, अकर्मण्य, अनियमिततापूर्ण कार्य करने वाले और पदों का दुरुपयोग


*नियम :-* 


आरटीआई की धारा 6(1) के तहत 30 दिन मे सूचना देने के प्रावधान है और 2 रु प्रति शुल्क लेकर दस्तावेज़ उपलब्ध कराने का प्रावधान है ।


आरटीआई की धारा 19(1) के तहत 30 दिन के बाद प्रथम अपील करने पर आरटीआई की धारा 7(6) के बिना शुल्क के मुफ्त सूचना सहित दस्तावेज़ उपलब्ध कराने का प्रावधान है ।   


सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 18 के तहत शिकायत करने पर सिर्फ सूचना आयुक्त 20(1) और 20(2) के तहत कार्रवाई कर सकता है।


*स्थिति :-*


आरटीआई आवेदन की तिथि :- 09/05/2018


केंद्रीय सूचना आयोग में धारा 18 के तहत शिकायत :- 20/06/ 2018


प्रथम अपील की तारीख :- 20/07/2018 


संपूर्ण पता लिखने के बाद लौटकर आ गया :- 01/08/2018


 दो बार प्रथम अपील किया और दोनों बार प्रथम अपील का पत्र लौट कर आ गया ।


केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा दी गई सूचना :- 22/10/2018


न ही प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम और पता


केंद्रीय सूचना आयोग के  सूचना आयुक्त श्री नीरज कुमार गुप्ता द्वारा 20-02-2020 को सुनवाई के दौरान किया। 


भ्रष्ट, कदाचारी, घूसखोर, अकर्मण्य, अनियमिततापूर्ण कार्य करने वाले और पदों का दुरुपयोग नीरज कुमार गुप्ता ने लिखा सूचना उपलब्ध करा दें किस नियम और आधार पर । 


सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 18 के तहत शिकायत करने पर किस नियम के तहत सूचना उपलब्ध कराने के लिए कहा।


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