रविवार, 1 मार्च 2026

⚜️ सिर्फ एफआईआर लंबित होने पर किसी के पासपोर्ट को सीमित या रद्द नहीं किया जा सकता ; पासपोर्ट रखना और विदेश यात्रा करना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अभिन्न भाग : हाई कोर्ट ⚜️

⚜️ सिर्फ एफआईआर लंबित होने पर किसी के पासपोर्ट को सीमित या रद्द नहीं किया जा सकता ; पासपोर्ट रखना और विदेश यात्रा करना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अभिन्न भाग : हाई कोर्ट  ⚜️

दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल में  एक महत्वपूर्ण फैसले में दोहराया है कि पासपोर्ट रखना और विदेश यात्रा करना संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21) के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
​जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव (Justice Purushaindra Kumar Kaurav) की पीठ ने
​ योगेश रहेजा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (Yogesh Raheja v. Union of India) के केस में सुरक्षित रखे गए इस निर्णय को
​27 फरवरी 2026 को सार्वजनिक किया है।
​        कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें रहेजा डेवलपर्स के पूर्व निदेशक का पासपोर्ट इस आधार पर जब्त (Impound) कर लिया गया था कि उन्होंने पासपोर्ट रिन्यूअल के समय अपने खिलाफ लंबित एक FIR की जानकारी नहीं दी थी।
​हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट रखना केवल एक सरकारी सुविधा नहीं, बल्कि एक मौलिक अधिकार है जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार (Article 21) के अंतर्गत आता है।
​राज्य (अर्थात सरकार) की कोई भी कार्रवाई, जो पासपोर्ट रखने के अधिकार को प्रभावित करती है, 
उसे 'तर्कसंगत' (Reasonable) होना चाहिए और 'प्राकृतिक न्याय' (Natural Justice) के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए।
​                                     कोर्ट ने पाया कि केवल FIR दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि आपराधिक कार्यवाही "लंबित" है। 
जब तक किसी सक्षम न्यायालय द्वारा अपराध का संज्ञान (Cognizance) नहीं लिया जाता, तब तक उसे पासपोर्ट रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
​प्रशासनिक अधिकारियों को पासपोर्ट जब्त करने जैसे कदम उठाने से पहले व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर देना चाहिए।
​याचिकाकर्ता योगेश रहेजा ने अक्टूबर 2024 में पासपोर्ट रिन्यूअल के लिए आवेदन किया था। प्रशासनिक अधिकारियों ने 17 जनवरी 2025 को उनका पासपोर्ट इस आधार पर जब्त कर लिया कि उन्होंने 2018 की एक FIR का खुलासा नहीं किया था। कोर्ट ने नोट किया कि उस मामले में कोर्ट ने संज्ञान (Cognizance) फरवरी 2025 में लिया था, यानी जब पासपोर्ट जब्त किया गया, तब तकनीकी रूप से मामला अदालत में लंबित नहीं था।

     दिल्ली उच्च न्यायालय ने जोर देकर कहा कि पासपोर्ट से संबंधित कोई भी कार्रवाई उचित, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का अनुरूप और निजी स्वतंत्रता का उल्लंघन न करने वाली होनी चाहिए। सिर्फ एफआईआर लंबित होने पर पासपोर्ट सीमित या रद्द नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने इस आधार पर केंद्र के प्रशासनिक अधिकारियों का आदेश रद्द कर दिया।

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