शुक्रवार, 30 जुलाई 2021

CBSE BOARD Results Link

 *CBSE BOARD*


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रविवार, 25 जुलाई 2021

जब हनुमान से हारे शनिदेव

 शनि के नाम से ही हर व्यक्ति डरने लगता है। शनि की दशा एक बार शुरू हो जाए तो साढ़ेसात साल बाद ही पीछा छोड़ती है। लेकिन हनुमान भक्तों को शनि से डरने की तनिक भी जरूरत नहीं। शनि ने हनुमान को भी डराना चाहा लेकिन मुंह की खानी पड़ी आइए जानें कैसे...

महान पराक्रमी हनुमान अमर हैं। पवन पुत्र हनुमान रघुकुल के कुमारों के कहने से प्रतिदिन अपनी आत्मकथा का कोई भाग सुनाया करते थे।

उन्होंने कहा कि मैं एक बार संध्या समय अपने आराध्य श्री राम का स्मरण करने लगा तो उसी समय ग्रहों में पाप ग्रह, मंद गति सूर्य पुत्र शनि देव पधारे। वह अत्यंत कृष्ण वर्ण के भीषणाकार थे। वह अपना सिर प्रायः झुकाये रखते हैं। जिस पर अपनी दृष्टि डालते हैं वह अवश्य नष्ट हो जाता है। शनिदेव हनुमान के बाहुबल और पराक्रम को नहीं जानते थे। हनुमान ने उन्हें लंका में दशग्रीव के बंधन से मुक्त किया था। वह हनुमान जी से विनयपूर्वक किंतु कर्कश स्वर में बोले हनुमान जी ! मैं आपको सावधान करने आया हूं। त्रेता की बात दूसरी थी, अब कलियुग प्रारंभ हो गया है। भगवान वासुदेव ने जिस क्षण अपनी अवतार लीला का समापन किया उसी क्षण से पृथ्वी पर कलि का प्रभुत्व हो गया। यह कलियुग है। इस युग में आपका शरीर दुर्बल और मेरा बहुत बलिष्ठ हो गया है।

अब आप पर मेरी साढेसाती की दशा प्रभावी हो गई है। मैं आपके शरीर पर आ रहा हूं।

शनिदेव को इस बात का तनिक भी ज्ञान नहीं था कि रघुनाथ के चरणाश्रि्रतों पर काल का प्रभाव नहीं होता। करुणा निधान जिनके हृदय में एक क्षण को भी आ जाते हैं, काल की कला वहां सर्वथा निष्प्रभावी हो जाती है। प्रारब्ध के विधान वहां प्रभुत्वहीन हो जाते हैं। सर्व समर्थ पर ब्रह्म के सेवकों का नियंत्रण-संचालन-पोषण प्रभु ही करते हैं। उनके सेवकों की ओर दृष्टि उठाने का साहस कोई सुर-असुर करे तो स्वयं अनिष्ट भाजन होता है। शनिदेव के अग्रज यमराज भी प्रभु के भक्त की ओर देखने का साहस नहीं कर पाते।

हनुमान जी ने शनिदेव को समझाने का प्रयत्न किया, आप कहीं अन्यत्र जाएं। ग्रहों का प्रभाव पृथ्वी के मरणशील प्राणियों पर ही पड़ता है। मुझे अपने आराध्य का स्मरण करने दें। मेरे शरीर में श्री रघुनाथजी के अतिरिक्त दूसरे किसी को स्थान नहीं मिल सकता।

लेकिन शनिदेव को इससे संतोष नहीं मिला। वह बोले, मैं सृष्टिकर्ता के विधान से विवश हूं। आप पृथ्वी पर रहते हैं। अतः आप मेरे प्रभुत्व क्षेत्र से बाहर नहीं हैं। पूरे साढे बाईस वर्ष व्यतीत होने पर साढ़े सात वर्ष के अंतर से ढाई वर्ष के लिए मेरा प्रभाव प्राणी पर पड़ता है। किंतु यह गौण प्रभाव है। आप पर मेरी साढ़े साती आज इसी समय से प्रभावी हो रही हो। मैं आपके शरीर पर आ रहा हूं। इसे आप टाल नहीं सकते।

फिर हनुमान जी कहते हैं, जब आपको आना ही है तो आइए, अच्छा होता कि आप मुझ वृद्ध को छोड़ ही देते'

फिर शनिदेव कहते हैं, कलियुग में पृथ्वी पर देवता या उपदेवता किसी को नहीं रहना चाहिए। सबको अपना आवास सूक्ष्म लोकों में रखना चाहिए जो पृथ्वी पर रहेगा। वह कलियुग के प्रभाव में रहेगा और उसे मेरी पीड़ा भोगनी पड़ेगी और ग्रहों में मुझे अपने अग्रज यम का कार्य मिला है। मैं मुख्य मारक ग्रह हूं। और मृत्यु के सबसे निकट वृद्ध होते हैं। अतः मैं वृद्धों को कैसे छोड़ सकता हूं।'

हनुमान जी पूछते हैं, आप मेरे शरीर पर कहां बैठने आ रहे हैं। शनिदेव गर्व से कहते हैं प्राणी के सिर पर। मैं ढाई वर्ष प्राणी के सिर पर रहकर उसकी बुद्धि विचलित बनाए रखता हूं। मध्य के ढाई वर्ष उसके उदर में स्थित रहकर उसके शरीर को अस्वस्थ बनाता हूं व अंतिम ढाई वर्ष पैरों में रहकर उसे भटकाता हूं।'

फिर शनिदेव हनुमान जी के मस्तक पर आ बैठे तो हनुमान जी के सिर पर खाज हुई। इसे मिटाने के लिए हनुमान जी ने बड़ा पर्वत उठाकर सिर पर रख लिया।

शनिदेव चिल्लाते हैं, यह क्या कर रहे हैं आप।' फिर हनुमान जी कहते हैं, जैसे आप सृष्टिकर्ता के विधान से विवश हैं वैसे मैं भी अपने स्वभाव से विवश हूं। मेरे मस्तक पर खाज मिटाने की यही उपचार पद्धति है। और आप अपना कार्य करें और मैं अपना कार्य।'

ऐसा कहते ही हुनमान जी ने दूसरा पर्वत उठाकर सिर पर रख लिया। इस पर शनिदेव कहते हैं, आप इन्हें उतारिए, मैं संधि करने को तैयार हूं।' उनके इतना कहते ही हनुमान जी ने तीसरा पर्वत उठाकर सिर पर रख लिया तो शनि देव चिल्ला कर कहते हैं, मैं अब आपके समीप नहीं आऊंगा। फिर भी हनुमान जी नहीं माने और चौथा पर्वत उठाकर सिर पर रख लिया। शनिदेव फिर चिल्लाते हैं, पवनकुमार ! त्राहि माम ताहि माम ! रामदूत ! आंजनेयाय नमः ! मैं उसको भी पीड़ित नहीं करूंगा जो आपका स्मरण करेगा। मुझे उतर जाने का अवसर दें।

हनुमान जी कहते हैं, बहुत शीघ्रता की। अभी तो पांचवां पर्वत (शिखर) बाकी है। और इतने में ही शनि मेरे पैरों में गिर गए, और कहा' मैं सदैव आपको दिये वचनों को स्मरण रखूंगा।'

आघात के उपचार के लिए शनिदेव तेल मांगने लगे। हनुमान जी तेल कहां देने वाले थे। वही शनिदेव आज भी तेलदान से तुष्ट होते हैं।

शुक्रवार, 23 जुलाई 2021

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अधीन निम्न एक्ट और नियम आते हैं :-*

 सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अधीन निम्न एक्ट और नियम आते हैं :-*


1) ऑफिशल सेक्रेट्स एक्ट, 1923

2) इंडियन एविडेंस एक्ट, 1872

3) कमीशन ऑफ इंक्वायरी एक्ट,1952

4) ऑल इंडिया सर्विस (कंडक्ट) रूल्स, 1955

5) सेंट्रल सिविल सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1955

6) रेलवे सर्विस (कंडक्ट) रूल्स, 1956

मंगलवार, 6 जुलाई 2021

Fasal बीमा करने का प्रोसेस

 ⏰⏰ *Fasal बीमा करने का प्रोसेस*: ⏰⏰


स्टेप 1: डिजिटल सेवा पोर्टल लॉगिन करे।


स्टेप 2: सर्च में जाकर *fasal* सर्च करना, निचे Pradhan Mantri Fasal bima yojna

क्लिक करें


स्टेप 3: CSC Connect में क्लिक करे।


स्टेप 4: States में जाकर छत्तीसगढ़ सेलेक्ट करे और

नीचे *1st में kharif प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना*


में क्लिक करे।


स्टेप 5:  *Application टैब* में जाये,  Application Form में क्लिक करके फॉर्म फील करे।



नोट : (डॉक्यूमेंट अपलोड करना है)

1) फसल बुआई प्रमाण पत्र(Showing certificate)

2) ऋण पुस्तिका

3) बैंक पासबुक


Thanks & Regards

CSC Durg Team 📞

एक महिला को जबरन इस्लाम में परिवर्तित किया गया था, और वकील ने अपने कक्ष में शादी की रस्में निभवायी थी।

 बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने शिकायत के बाद एक वकील का लाइसेंस निलंबित कर दिया है, जिसपे आरोप लगाया गया है कि एक महिला को जबरन इस्लाम में परिवर्तित किया गया था, और वकील ने अपने कक्ष में शादी की रस्में निभवायी थी।


 

वकील (इकबाल मलिक) पर सोहन सिंह तोमर ने आरोप लगाया है कि उसकी बेटी को जबरन मुस्लिम धर्म में परिवर्तित किया गया और उसकी शादी वकील के कड़कड़डूमा जिला अदालत कक्ष करा दी गयी।


बीसीडी सचिव पीयूष गुप्ता ने इकबाल को नोटिस जारी कर कहा है कि काउंसिल ने आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है. जिनसे तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने की उम्मीद की गयी है।अंतरिम उपाय के रूप में, बार काउंसिल ने समिति की रिपोर्ट देने तक इकबाल के लाइसेंस को निलंबित करने का निर्णय लिया है। इकबाल को सात दिनों के भीतर नोटिस का जवाब देना है।


बीसीडी के अनुसार, इस तरह की गतिविधियों की अनुमति नहीं है और ये किसी वकील की पेशेवर गतिविधियों का हिस्सा नहीं हैं। यह आरोप कि उन्होंने निकाह किया और धर्म परिवर्तन का प्रमाण पत्र जारी किया, कानूनी पेशे की गरिमा को नकारता है।


यह आरोप लगाया जाता है कि इकबाल अपने कक्ष से धर्मांतरण ट्रस्ट चलाता है और कथित पीड़िता को जारी किए गए विवाह प्रमाण पत्र के अनुसार, वकीलों के कक्ष को निकाह की जगह के रूप में उल्लेख करता है।


तोमर ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि इकबाल के कक्ष को मस्जिद के रूप में दिखाया गया है।


नोटिस के अनुसार, अदालत में एक वकील के चैंबर के परिसर में निकाह और धर्मांतरण जैसी गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती है ।


बार काउंसिल के अध्यक्ष श्री रमेश गुप्ता ने दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल और डीसीपी से मामले की जानकारी काउंसिल को उपलब्ध कराने और उनका सहयोग करने का अनुरोध किया है।


 

एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक को दिए अपने बयान में, इकबाल ने कहा कि उन्हें नोटिस की एक प्रति नहीं मिली है और उनके खिलाफ आरोप झूठे हैं। उन्होंने आगे कहा कि महिला ने सुरक्षा के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

कमाल है! कभी थी पत्नी…. अब बन गई सौतेली मां…. पिता ने बेटे की पत्नी से रचाई शादी…. जानिए कैसे खुली मामले की पोल….

 उत्तर प्रदेश 5 जुलाई 2021। यूपी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसको सुनकर आपके भी होश उड़ जाएंगे। दरअसल एक ससुर ने अपने ही बेटे की तलाकशुदा पत्नी के साथ शादी रचा ली। यह मामला बदायूं का है जो इस समय खूब चर्चा बटोर रहा है।

ससुर से की शादी

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बताया जा रहा है कि लड़के की शादी साल 2016 में हुई थी उस समय लड़का और लड़की दोनों ही नाबालिग थे, लेकिन शादी के बाद कुछ विवाद की वजह से दोनों करीब 5-6 महीने बाद अलग रहने लगे, बताते हैं कि लड़के ने समझौते की तमाम कोशिशें की लेकिन लड़की तलाक पर अड़ी रही और तलाक हो गया। मामले में नया मोड़ अब जाकर सामने आया जब युवक से तलाक लेने के बाद उसकी पत्‍नी को अपने ससुर से प्रेम हो गया और वह जैसे ही बालिग हुई, उसने ससुर से कानूनी तौर पर शादी रचा ली और साथ रहने लगी।

RTI से खुली पोल

बाद में युवक का पिता जो सफाई कर्मी है वो युवक का साथ छोड़कर संभल में रहने लगा तो लड़के ने जनहित याचिका (RTI) दायर की तो उसमें जो जानकारी सामने आई उसने उसके होश उड़ा दिए। पता चला कि उसकी पत्‍नी ने उसे तलाक देकर युवक के पिता से ही शादी कर ली यही नहीं अब इन दोनों के 2 साल का एक बच्‍चा भी है। पुलिस ने यह भी बताया कि युवक शराब पीने का आदी है जैसे ही उसे पता चला कि उसके पिता ने उसकी पत्‍नी से ही शादी की है तो उसने बिसौली पुलिस स्‍टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।

शुक्रवार, 2 जुलाई 2021

घर में घुस आएं सांप तो मारें नहीं, करें ये उपाय

 रायपुर। देश के कई हिस्सों में मानसून ने दस्तक दे दी है। बारिश शुरू होने के साथ ही घरों में सांप-बिच्छू जैसे जीवों के घुस आने की समस्या बढ़ जाती है। सांप से बचने के लिए उसे भगाने की बजाए लोग अक्सर उसे मार देते हैं। जबकि थोड़ी सी समझदारी से हम सांप को मारे बिना उससे बच सकते हैं। छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम कर रही नोवा नेचर सोसाइटी के सेक्रेटरी मोइज अहमद कहते हैं कि सांप एक जहरीला जीव है, उससे डरना लाजिमी है लेकिन उसे मारना सही नहीं है।

क्यों जरूरी है सांपों का संरक्षण
मोइज अहमद ने बताया कि भारत में पाए जाने वाले सांपों में 20 प्रतिशत ही जहरीले होते हैं, बाकी 80 प्रतिशत जहरीले नहीं होते हैं। उन्होंने बताया कि सांपों को बचाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि ये प्रकृति के भोजन चक्र का सबसे अहम हिस्सा हैं, पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि भारत कृषि प्रधान देश है, यहां पाए जाने वाले चूहे फसल का पांचवां हिस्सा चट कर देते हैं। हमारे खेतों में पाए जाने वाले नाग और धामन सांप इन चूहों का शिकार करते हैं जिससे हमारे फसल सुरक्षित रहते हैं। इसलिए सांपों का संरक्षण जरूरी है।
घर में सांप घुस आए तो क्या करें
>यदि घर में सांप घुस आए तो सभी तरफ मिट्टी तेल या फिनाइल छिड़क दें, उसकी स्मेल सूंघकर सांप खुद-ब-खुद बाहर निकल जाएगा।
>एक लंबा डंडा लेकर सांप के सामने रखें, सांप उसमें चढ़ जाएगा इसके बाद उसे उठाकर बाहर निकालें और घर से दूर ले जाकर छोड़ दें।
>सांप एक ऐसा जीव है जो दीवार/बाउंड्री के किनारे रेंगता है, जिस जगह पर सांप हो उससे थोड़ी दूर पर पाइप से बोरा बांधकर रख दें, सांप जब बोरे में घुस जाए तो बोरा बांधकर दूर जंगल में ले जाकर छोड़ दें।
छत्तीसगढ़ में दिखे सांप तो करें फोन
नोवा नेचर सोसाइटी छत्तीसगढ़ में 2005 से काम कर रही है, सोसाइटी ने अब तक प्रदेश के विभिन्न शहरों से 15 प्रजाति के 3000 से ज्यादा सांप रेस्क्यू किए हैं। नोवा नेचर छत्तीसगढ़ की एकमात्र संस्था है जिसे सांप पकड़ने की अनुमति मिली है, बिना अनुमति सांप पकड़ना गैर कानूनी है। संस्था के लोग एक कॉल पर सांप पकड़ने पहुंचते हैं। छत्तीसगढ़ में सांप दिखे तो इन नंबरों पर फोन किया जा सकता है: रायपुर- 9303345640, 9329100065, 9300525486, नया रायपुर-9826117561, दुर्ग-भिलाई- 999 3454757, जशपुर- 9300851869.
सांप काटें तो क्या करें
>छत्तीसगढ़ में संजीवनी 108 की लगभग सभी वाहनों में एंटी वेनम उपलब्ध हैं, सांप काटने पर सबसे पहले 108 को कॉल करें।
>सांप के काटने पर पीड़ित को शांत रहना चाहिए, पैनिक करने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है जिससे जहर तेजी से शरीर में फैलता है। इसलिए मेडिकल मदद के पहुंचते तक पीड़ित को शांत रहना चाहिए।
>शरीर के जिस हिस्से पर सांप ने काटा हो उसे स्थिर रखें।
>सांप काटने के बाद घाव को धोने, घरेलू इलाज करने में समय नष्ट करने की बजाए उसे जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाएं।
>काट कर चूसने जैसे उपाय न करें, न ही दबाव डालने वाली पट्टी बांधें। ये दोनों बिलकुल भी कारगर नहीं हैं। ज्यादातर मामलों में हमें लगता है कि ये उपयोगी हैं क्योंकि हमारे आसपास पाए जाने वाले ज्यादातर सांप कम जहरीले होते हैं। इन विधियों के अपनाने से कई बार पीड़ित को ज्यादा ब्लीडिंग हो जाती है जिससे उसकी मौत हो सकती है, साथ ही इससे इंफेक्शन का खतरा भी बना रहता है।