*#शेयर #रुकना #नही #चाहिए जब तक संसोधन न हो*
*#भरण_पोषण_crpc125 के खिलाफ महा आन्दोलन।*
सेवा में
1-उच्चतम न्यायालय
2-भारत के सभी उच्च न्यायालय
3- प्रधानमंत्री महोदय
4-कानून मंत्री महोदय
5-RSS के राष्ट्रीय अध्यक्ष
माननिये महोदय आपसे अनुरोध करते हुए कुछ मांगो से अवगत करना चाहता हूँ की आज पुरुष क्यों प्रताड़ित एवं स्वयं को ठगा महसूस कर रहा है
हमारी मांगें निम्न प्रकार है
०१.माननिये उचतम न्यायालय ने धारा 497IPC को हटाते हुए टिप्पणी की थी की पत्नी पति की जागीर नहीं तो फिर पति से गुजारा भत्ता व भरण पोषण किस बात को दर्शाता है और ये कँहा तक न्यायिक है अतः भरण पोसन व गुजारा भत्ता की सभी धाराओं को तत्काल समाप्त किया जाये
०२. धारा 125crpc(भरण पोषण ) को तत्काल समाप्त किया जाये क्योंकि स्वस्थ मानसिक व शारीरिक रूप से पड़ी लिखी महिलाएं अपने पति से गुजरा भत्ता पाने के योग्य नहीं है इसी प्रकार धरा १२ घरेलु हिंसा से महिलाओ के संरक्षण अधिनियम २००५ को समाप्त किया जाये जिससे की पुरुषो का उत्पीड़न बंद हो जाये तथा हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत धरा २४ को तत्काल समाप्त किया जाये जो की आप अप्रत्यक्ष रूप से गुजरा भत्ता को दर्शाता है
०३.एक तरफ एक महिला अपने पति व ससुराल जनों के ऊपर आपराधिक केस दर्ज करवाती है और दूसरी तरफ गुजरा भत्ता व भरण पोसन का केस करती है तो उसके एक केस को सुन्ना चाहिए चाहे वह अपने पति व ससुराल वालों को अपराधी बना लें या फिर अपने पति से गुजरा भत्ता व भरण पोषण ले ले
०४.एक अनपढ़ पुरुष अपने पुरे परिवार का भरण पोसन करता है तो एक स्वस्थ व पड़ी लिखी महिला अपना भरण पोषण स्वयं क्यों नहीं कर सकती अतः स्वस्थ व पड़ी लिखी महिला को गुजरा भत्ता या भरण पोसन नहीं मिलना चाहिए
०५.जैसा की हमारे प्रधानमंत्री जी ने कहा है की आतम निर्भर बने तो एक पुरुष तो आतम निर्भर बन जाता है परन्तु झूठे केस करने वाली महिलाएं भी आतम निर्भर बने क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा महिला के कौशल विकास एवं आयो पार्जन लिए बहुत योजना चलाई जा रही है एवं हमारे प्रधानमंत्री स्वयं कहतें है की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ तो पड़ी लिखी महिला गुजारा भत्ता या भरण पोषण के योग्य नहीं है
अतः आपसे अनुरोध है की हमारी इन माँगो को देखते हुए केंद्र सरकार व कानून मंत्री को अवगत करते हुए हमारी माँगो को तत्काल पूर्ती किया जाये
मर्द को भी दर्द होता है , हमें चाहियें पुरुष आयोग
*भारत के सभी पत्नी पीड़ित पुरुष व उनके परिवार वाले।*
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