रविवार, 27 दिसंबर 2020

PMGDISHA

 

Pradhan Mantri Gramin Digital Saksharta Abhiyaan is the scheme to make six crore persons in rural areas, across States/UTs, digitally literate, reaching to around 40% of rural households by covering one member from every eligible household by 31st March, 2019.

Making one person in every family digitally literate is one of the integral components of the Prime Minister's vision of "Digital India".

To make a person digitally literate, so that he/she can operate digital devices (like Tablets, Smart phones etc) send and receive emails & browse Internet for information and undertake digital payment etc.

Objective:-

Making one person in every family digitally literate is one of the integral components of the Prime Minister's Vision of "Digital India"

सोमवार, 14 दिसंबर 2020

जब द्रौपदी ने कृष्ण की लाज बचाई

 



सभी जानते हैं कि जब युधिष्ठिर जुए में द्रौपदी को भी हार गए थे और दुष्ट दु:शासन उसको निर्वस्त्र करने का प्रयास कर रहा था द्रौपदी ने कृष्ण का स्मरण किया था तब प्रभु ने द्रौपदी की साड़ी को अन्तहीन कर दिया था और इस प्रकार उसकी लाज बचाई थी। इस चमत्कार का कवि भूषण (?) ने ऐसे वर्णन किया है:

सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है
नारी ही कि सारी है कि सारी ही कि नारी है

दक्षिण भारत में एक मनोहर आख्यान प्रचलित है जिसमें द्रौपदी ने कृष्ण की लाज बचाई थी:

एक बार पाँचो पान्डव और कृष्ण एक कुंड में स्नान कर रहे हैं। सभी ने केवल लँगोटी पहन रखी है। अकस्मात कृष्ण की लँगोटी खुल जाती है और पानी में चली जाती है। काफी समय बीच चुका है किंतु कृष्ण समझ नहीं पा रहे हैं कि कैसे पानी से निकलें। बगल के कुंड में द्रौपदी सखियों के साथ नहा रही है। वह समझ जाती है कि क्या हो रहा है। वह अपनी साड़ी से एक चीर फाड़ कर कृष्ण की ओर फेंक देती है। कृष्ण बहुत कृतज्ञ होते हैं और वादा करते हैं कि अवसर आने पर वह द्रौपदी के इस ऋण को अवश्य अदा करेंगे।

गुरुवार, 10 दिसंबर 2020

CSC Tale Law :मुफ्त में क़ानूनी सलाह पाये All India Anywhere

सरकार ने न्याय को आसान बनाने के लिए क्षेत्र गरीब और कमजोर लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देने की 'टेली लॉ' योजना शुरू की है। इस योजना में कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए जरूरतमंदों को वकीलों से मुफ्त कानूनी सहायता मिलेगी।

इस योजना में 'टेली ला' नाम का एक पोर्टल होगा जो कि सभी कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर उपलब्ध होगा। यह पोर्टल प्रौद्योगिकी सक्षम प्लेटफार्मो की सहायता से लोगों को कानूनी सेवा प्रदाताओं से जोड़ेगा। टेली ला के जरिए लोग वीडियो कान्फ्रेंसिंग से कामन सर्विस सेंटर पर वकीलों से कानूनी सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा ला स्कूल क्लीनिकों, जिला विधिक सेवा प्राधिकारियों, स्वयं सेवा प्रदाताओं और कानूनी सहायता और अधिकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों को भी सीएससी से जोड़ा जाएगा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नाल्सा) राज्यों की राजधानियों से वकीलों का एक पैनल उपलब्ध कराएगा जो जरूरतमंदों को वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिये कानूनी सलाह और परामर्श देंगे। टेली ला योजना का शुभारंभ करते हुए विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह सेवा शुरू करके सरकार ने गरीबों तक न्याय और अधिकारिता की पहुंच सुनिश्चित करने का अपना वादा निभाया है। 

सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया (CSC e-Governance Services India Ltd) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) दिनेश त्यागी ने कहा कि जम्मू कश्मीर (Jammu & Kashmir) और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों (Notheastern States) में कानूनी परामर्श की मांग को देखते हुए 117 महत्वाकांक्षी जिलों के करीब 30 हजार सीएससी में हाल ही में इस सेवा की शुरुआत की गयी है.


EPF से आप कैसे और कब निकाल सकते हैं पैसे?

 EPF में योगदान वैसे तो रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि हमें जॉब के बीच में ही पीएफ से पैसा निकालने की जरूरत पड़ जाती है.अगर आप प्राइवेट जॉब में हैं तो आपके वेतन का एक हिस्सा हर महीने ईपीएफ यानी इम्पलॉई प्रोविडेंट फंड या कर्मचारी भविष्य निधि में जरूर जमा होता होगा. आपको हर महीने की सैलरी स्लिप में इसकी जानकारी भी मिलती होगी.


EPF में योगदान वैसे तो रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि हमें जॉब के बीच में ही पीएफ से पैसे निकालने की जरूरत पड़ जाती है.

अगर आपके सामने भी ऐसी कोई जरूरत आ जाए तो आप आसानी से अपने EPF अकाउंट से पैसे निकाल सकते हैं. ..


जरूरत के हिसाब से निकाल सकते हैं पीएफ का पैसा


अपने पीएफ से आप कितनी रकम निकाल सकते हैं यह आपके पीएफ अकाउंट की स्थिति पर निर्भर करता है. अगर आप अपनी संतान, भाई/बहन या अपनी शादी के लिए पीएफ से रकम निकालना चाहते हैं, तो आपकी तरफ से PF अकाउंट में किये गए योगदान का 50% हिस्सा निकाला जा सकता है.

इसके लिए भी हालांकि यह जरूरी है कि आपको जॉब करते हुए 7 साल पूरे हो गए हों. अपनी या संतान की उच्च शिक्षा के लिए आप EPF अकाउंट में अपने योगदान का 50% रकम ब्याज के साथ निकाल सकते हैं ..

गुरुवार, 3 दिसंबर 2020

पैन फॉर्म 60 क्या है?

 भारत सरकार ने आय कमाने वाले समूहों और वित्तीय ट्रांजेक्शन करने वाले नागरिकों के लिए पैन कार्ड आनिवार्य कर दिया है। पैन कार्ड को सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ में से एक माना जाता है जिसका लाभ वित्तीय ट्रांजेक्शन, पहचान प्रमाण, टैक्स रिटर्न भरने आदि के लिए लिया जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति या कंपनी के पास पैन नहीं है, तो उन्हें ट्रांजेक्शन  का लाभ उठाने  के लिए  संबंधित प्राधिकरण को पैन फॉर्म 60 जमा करना होगा।

भारत का आयकर विभाग टैक्स चोरी या संस्थाओं द्वारा की गई किसी भी धोखाधड़ी गतिविधियों से बचने के लिए वित्तीय ट्रांजेक्शन
को ट्रैक करने के लिए पैन का उपयोग करता है। हालांकि, पैन कार्ड होना ज़रूरी है लेकिन, कुछ ऐसी परिस्थितियां हो सकती हैं, जहां व्यक्ति पैन कार्ड रखने में विफल हो जाते हैं। इसके लिए ट्रांजेक्शन को आगे बढ़ाने के लिए अन्य दस्तावेज़ों के साथ फॉर्म 60 जमा किया जा सकता है।

पैन फॉर्म 60 क्या है?

यह एक आधिकारिक दस्तावेज़ है जो उन व्यक्तियों द्वारा पेश किया जाता है जिनके पास वित्तीय ट्रांजेक्शन या बैंक अकाउंट
खोलने केलिए पैन कार्ड नहीं है। फॉर्म 60 का उपयोग प्रॉपर्टी को खरीदने और बेचने,50,000 रु. से अधिक के नगद भुगतान
पर, टैक्स रिटर्न दाखिल करना , व्यवसाय का रजिस्ट्रेशन और अन्य के लिए किया जाता है। इस मामले में, यदि आपके पास
पैन कार्ड नहीं है, तो वित्तीय ट्रांजेक्शन के लिए फॉर्म 60 एक दस्तावेज़ होना चाहिए।

फॉर्म 60 की अनिवार्यता

फॉर्म 60 की आवश्यकता तब होती है जब किसी व्यक्ति के पास पैन कार्ड नहीं है और नीचे दी गयीं वित्तीय ट्रांजेक्शन करना चाहता है:

  • अचल प्रॉपर्टी को खरीदने या बेचने पर, जिसकी कीमत 5 लाख रु. या इससे अधिक है
  • किसी भी मोटर वाहन को खरीद या बेचने पर (टू-व्हीलर वाहनों को छोड़कर)
  • किसी भी बैंक में 50,000 रु. या इससे अधिक का फिक्स्ड डिपॉज़िट अकाउंट खोलना
  • सेविंग बैंक अकाउंट में 50,000 रु. या इससे अधिक जमा करने के लिए
  • कोई भी कॉन्ट्रैक्ट जिसकी कीमत 10 लाख रु. या इससे अधिक हो और सिक्योरिटिज़ को खरीदने और बेचने के लिए
  • किसी भी वित्तीय संस्थान या बैंक में अकाउंट खोलने के लिए
  • मोबाइल फोन समेत टेलीफोन कनेक्शन के लिए आवेदन करने के लिए
  • होटल या रेस्टोरेंट में 25,000 रु. या इससे अधिक के बिलों का भुगतान करने के लिए

ऊपर दिए गए वित्तीय ट्रांजेक्शन आम तौर पर व्यक्तियों / कंपनी द्वारा किए जाते हैं, जिसके लिए उन्हें पैन कार्ड की न होने पर फॉर्म 60 की आवश्यकता होती है।

फॉर्म 60 के लिए आवश्यक दस्तावेज़

फॉर्म 60 जमा करने से पहले व्यक्तियों को फॉर्म 60 के साथ-साथ पहचान या प्रमाण पते के प्रमाण  प्रदान  करने के लिए नीचे  दिए गए कुछ दस्तावेज़ों को पेश करना चाहिए। कुछ दस्तावेज़ों में शामिल हैं:

(A) ड्राइविंग लाइसेंस

(B) पासपोर्ट

(C) राशन कार्ड

(D) एक मान्यता प्राप्त संस्थान से पहचान प्रमाण

(E) बिजली बिल या टेलीफोन बिल की कॉपी

( F)  फॉर्म में उल्लिखित पते से जुड़ा कोई भी प्रमाण

फॉर्म 60 भरने की प्रक्रिया

पैन कार्ड के बजाय फॉर्म 60 के साथ आगे बढ़ने का फैसला लेने से पहले सभी जानकारियों को जानना महत्वपूर्ण है।फॉर्म भरने और  जमा करने से पहले नीचे दी गई सभी बातों को ध्यान में रखें और निम्नलिखित जानकारी उसमें भरें:

  • आवेदक का पूरा नाम और पता
  • आवदेक की जन्मतिथी और पिता का नाम(व्यक्तिगत के मामले में)
  • मोबाइल नंबर के साथ आवेदक का पूरा पता
  • ट्रांजेक्शन की जानकारीऔर ट्रांजेक्शन राशि
  • यदिआपने टैक्स का आकलन किया है, तो अपनी जानकारी, रेंज, वार्ड या सर्कल का उल्लेख करें जहां आपने अंतिम बार इनकम टैक्स दर्ज किया था
  • आधारनंबर भरें, अगर आपके पास है तो
  • अगर आपने पैन के लिए आवेदन किया है और पैन नहीं मिला है तो आवेदन की तारीख और रसीद नंबर दें

फॉर्म भरते समय ध्यान रखें कि उसमें किसी भी तरह की कोई गलती या ओवरराइटिंग न हो।

फॉर्म 60 कैसे जमा करें?

फॉर्म 60 जमा करने में ऐसी कोई बड़ी बात नहीं है।फॉर्म में सभी जानकारियों को ध्यान से भरने  के बाद  कोई भी वित्तीय  ट्रांजेक्शन  करने से पहले इसे आसानी से संबंधित प्राधिकरण को सौंपा जा सकता है। यह ट्रांजेक्शन करने पर लाभ और प्रमाण को सुनिश्चित  करेगा।

संबंधित सवाल

प्रश्न. कब तक मुझे पैन / फॉर्म 60 जमा करना है?
उत्तर: आपको बैंक खाता खोलते समय आदर्श रूप से पैन / फॉर्म 60 जमा करना चाहिए।

प्रश्न. अगर मैं अपना पैन / फॉर्म 60 अपडेट नहीं करता तो क्या होगा?
उत्तर: यदि आपका पैन / फॉर्म 60 अपडेट नहीं है, तो आप 50,000 रुपये से अधिक का ट्रांजेक्शन नहीं कर पाएंगे। 

भारत में पैन कार्ड कार्यालय अन्य पैन कार्ड फॉर्म
दिल्ली में पैन कार्ड केंद्रफॉर्म 61
गुड़गांव में पैन कार्ड केंद्रफॉर्म 49 ए
मुंबई में पैन कार्ड केंद्रफॉर्म 49AA
नोएडा में पैन कार्ड केंद्रफॉर्म 60
बैंगलोर में पैन कार्ड केंद्र
चेन्नई में पैन कार्ड केंद्र
कोलकाता में पैन कार्ड केंद्र
पुणे में पैन कार्ड केंद्र
हैदराबाद में पैन कार्ड केंद्र
वडोदरा में पैन कार्ड केंद्र

रविवार, 27 सितंबर 2020

[ वाहन दुर्घटना मुआवजा] बीमा कंपनी उत्तरदायी नहीं, जब तक कि मालिक ये साबित ना कर दे कि उसने ड्राइवर के लाइसेंस की जांच की या उसे समय पर नवीनीकृत करवाने को कहा था : सुप्रीम कोर्ट

जब एक नियोक्ता किसी चालक को नियुक्त करता है, तो उसे यह ध्यान रखना होगा कि उसका कर्मचारी समय के भीतर अपने लाइसेंस को नवीनीकृत करवाए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि अगर चालक ने अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया, तो बीमा कर्मचारी को तब तक उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता जब तक कि मालिक ये साबित नहीं कर दे कि उसने ड्राइविंग लाइसेंस की जांच की या उसे निर्देश दिए थे कि ड्राइवर अपने ड्राइविंग लाइसेंस को समाप्ति की तिथि पर नवीनीकृत करवाए।


इस मामले में, राजिंदर कुमार को बेली राम द्वारा एक ड्राइवर के रूप में रखा गया था। राजिंदर के साथएक दुर्घटना हुई, जब वो बेली राम का ट्रक चला रहा था। उसने कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 के तहत एक याचिका दायर की। आयुक्त ने एक अवार्ड पारित किया जिसमें बीमा कंपनी को 94,464/ - रुपये चोटों के लिए और 6,3,313/ - रुपये चिकित्सा व्यय के लिए का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।इसका ब्याज नियोक्ता द्वारा भुगतान करने के लिए निर्देशित किया गया था। अपील में, उच्च न्यायालय ने बीमा कंपनी के किसी भी दायित्व से इनकार कर दिया था, क्योंकि बीमाकर्ता का ड्राइविंग लाइसेंस संबंधित समय में समाप्त हो गया था।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विचार किए गए कानून का सवाल यह था कि क्या वैध ड्राइविंग लाइसेंस के मामले में, यदि लाइसेंस की अवधि समाप्त हो गई है, तो बीमित व्यक्ति अपनी देयता से बच सकता है? अदालत ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां एक लाइसेंस का नवीनीकरण कम अवधि के लिए नहीं किया गया है, जैसे एक महीने के लिए, जैसा कि स्वर्ण सिंह के मामले में माना गया था, जहां बीमा कंपनी पर बोझ डालकर तीसरे पक्ष को लाभ दिया गया था। पीठ ने इस प्रकार कहा :

"हमारा विचार है कि एक बार ड्राइविंग लाइसेंस को सत्यापित करने की मूल देखभाल नियोक्ता द्वारा लेनी होगी, हालांकि एक विस्तृत जांच आवश्यक नहीं हो सकती है, वाहन के मालिक को लाइसेंस में ही पता चल जाएगा कि ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता क्या है। यह नहीं कहा जा सकता है कि इसके बाद वह यह जांचने की ज़िम्मेदारी से हाथ धो सकता है कि ड्राइवर ने लाइसेंस को नवीनीकृत नहीं किया है। यह ऐसा मामला नहीं है जहां लाइसेंस को कुछ समय के लिए नवीनीकृत नहीं किया गया है जैसे की एक महीने के लिए, जैसा कि स्वर्ण सिंह के मामले में माना गया था, जहां बीमा कंपनी को बोझ देकर तीसरे पक्ष को लाभ दिया गया था। तत्काल मामले में लाइसेंस का नवीनीकरण तीन साल की अवधि के लिए नहीं किया गया है और वह भी ट्रक की तरह वाणिज्यिक वाहन के संबंध में। अपीलकर्ता ने उसको सत्यापित करने में घोर लापरवाही दिखाई।"


 जब एक नियोक्ता किसी चालक को नियुक्त करता है, तो उसे यह ध्यान रखना होगा कि उसका कर्मचारी समय के भीतर अपने लाइसेंस को नवीनीकृत करवाए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि अगर चालक ने अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया, तो बीमा कर्मचारी को तब तक उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता जब तक कि मालिक ये साबित नहीं कर दे कि उसने ड्राइविंग लाइसेंस की जांच की या उसे निर्देश दिए थे कि ड्राइवर अपने ड्राइविंग लाइसेंस को समाप्ति की तिथि पर नवीनीकृत करवाए।

 Also Read - [एयरफेयर रिफंड] SC ने COVID-19 लॉकडाउन के दौरान बुकिंग करने वाले फ्लाइट टिकट के रिफंड की मांग करने वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा इस मामले में, राजिंदर कुमार को बेली राम द्वारा एक ड्राइवर के रूप में रखा गया था। राजिंदर के साथएक दुर्घटना हुई, जब वो बेली राम का ट्रक चला रहा था। उसने कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 के तहत एक याचिका दायर की। आयुक्त ने एक अवार्ड पारित किया जिसमें बीमा कंपनी को 94,464/ - रुपये चोटों के लिए और 6,3,313/ - रुपये चिकित्सा व्यय के लिए का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।इसका ब्याज नियोक्ता द्वारा भुगतान करने के लिए निर्देशित किया गया था। अपील में, उच्च न्यायालय ने बीमा कंपनी के किसी भी दायित्व से इनकार कर दिया था, क्योंकि बीमाकर्ता का ड्राइविंग लाइसेंस संबंधित समय में समाप्त हो गया था। 

Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने धर्म के आधार पर COVID-19 का डेटा या सूचना के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विचार किए गए कानून का सवाल यह था कि क्या वैध ड्राइविंग लाइसेंस के मामले में, यदि लाइसेंस की अवधि समाप्त हो गई है, तो बीमित व्यक्ति अपनी देयता से बच सकता है? अदालत ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां एक लाइसेंस का नवीनीकरण कम अवधि के लिए नहीं किया गया है, जैसे एक महीने के लिए, जैसा कि स्वर्ण सिंह के मामले में माना गया था, जहां बीमा कंपनी पर बोझ डालकर तीसरे पक्ष को लाभ दिया गया था। पीठ ने इस प्रकार कहा : 

Also Read - [झूठा घोषणा पत्र] सुप्रीम कोर्ट ने उसे गुमराह करने के लिए गोरखपुर की सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किया "हमारा विचार है कि एक बार ड्राइविंग लाइसेंस को सत्यापित करने की मूल देखभाल नियोक्ता द्वारा लेनी होगी, हालांकि एक विस्तृत जांच आवश्यक नहीं हो सकती है, वाहन के मालिक को लाइसेंस में ही पता चल जाएगा कि ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता क्या है। यह नहीं कहा जा सकता है कि इसके बाद वह यह जांचने की ज़िम्मेदारी से हाथ धो सकता है कि ड्राइवर ने लाइसेंस को नवीनीकृत नहीं किया है। यह ऐसा मामला नहीं है जहां लाइसेंस को कुछ समय के लिए नवीनीकृत नहीं किया गया है जैसे की एक महीने के लिए, जैसा कि स्वर्ण सिंह के मामले में माना गया था, जहां बीमा कंपनी को बोझ देकर तीसरे पक्ष को लाभ दिया गया था। तत्काल मामले में लाइसेंस का नवीनीकरण तीन साल की अवधि के लिए नहीं किया गया है और वह भी ट्रक की तरह वाणिज्यिक वाहन के संबंध में। अपीलकर्ता ने उसको सत्यापित करने में घोर लापरवाही दिखाई।" 

Also Read - [आईपीसी की धारा 120 बी] असम्बद्ध तथ्यों या अलग-अलग स्थानों तथा समयों पर किये गये आचार-व्यवहार के तार्किक लिंक के बिना साजिश की बात नहीं मानी जा सकती:... उसके बाद पीठ ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम आकांक्षा व अन्य में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम मनोज कुमार व अन्य में इलाहाबाद हाईकोर्ट और हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम हेम राज में की गई टिप्पणियों का उल्लेख किया। पीठ ने विशेष रूप से हेम राज में की गई टिप्पणियों का हवाला दिया: "18. जब एक नियोक्ता किसी चालक को नियुक्त करता है, तो यह जांचना उसका कर्तव्य है कि चालक को वाहन चलाने के लिए विधिवत लाइसेंस प्राप्त है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा- 5 में कहा गया है कि मोटर वाहन का प्रभारी कोई भी मालिक या व्यक्ति मोटर वाहन अधिनियम की धारा 3 और 4 की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करने पर किसी भी व्यक्ति को वाहन चलाने की अनुमति देगा या नहीं देगा। मालिक को यह दिखाना होगा कि उसने लाइसेंस सत्यापित कर लिया है। उसे यह भी ध्यान रखना होगा कि उसका कर्मचारी समय के भीतर अपने लाइसेंस का नवीनीकरण करवा ले। मेरी राय में, मालिक के पास यह दलील देने के लिए कोई बचाव नहीं है कि वह भूल गया कि उसके कर्मचारी के ड्राइविंग लाइसेंस को नवीनीकृत किया जाना था। एक व्यक्ति जब वह अपने मोटर वाहन को एक चालक को सौंपता है, तो बड़े पैमाने पर समाज के लिए कुछ जिम्मेदारी होती है। निर्दोष लोगों की जान जोखिम में डालकर वाहन को ऐसे व्यक्ति को सौंप दिया जाता है जो विधिवत लाइसेंस नहीं लेता है। इसलिए, यह दिखाने के लिए कुछ सबूत होना चाहिए कि मालिक ने या तो ड्राइविंग लाइसेंस की जांच की थी या अपने ड्राइवर को निर्देश दिया था कि वह अपने ड्राइविंग लाइसेंस को समाप्ति की तारीख पर नवीनीकृत करवाए। वर्तमान मामले में, ऐसे किसी भी सबूत को पेश नहीं किया गया है। उपरोक्त चर्चा के मद्देनज़र, मैं स्पष्ट रूप से यह देख रहा हूं कि पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन था और दावे को पूरा करने के लिए बीमा कंपनी को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता था।" उपरोक्त टिप्पणियों का ध्यान रखते हुए, बेंच ने कहा: "हमने उपर्युक्त टिप्पणियों को फिर से प्रस्तुत किया है क्योंकि हमारा विचार है कि यह स्पष्ट रूप से सही कानूनी स्थिति निर्धारित करता है और हम तीन अलग-अलग उच्च न्यायालयों के तीनों निर्णयों में दिए गए विचारों के साथ पूर्ण सहमति में हैं, जो कि हेम राज मामले में फैसले में सही कानूनी सिद्धांत है।" पीठ ने आखिरकार अपील खारिज कर दी।

Thank you 




मंगलवार, 22 सितंबर 2020

मृत्यु से अधिक सत्य कुछ भी नहीं है।

 #विश्व_प्रसिद्ध_फैशन_डिजाइनर, ब्लॉगर और लेखक "किर्ज़िदा रोड्रिग्ज" द्वारा लिखा गया एक नोट कैंसर से मरने से पहले।

 ---

 1. दुनिया की सबसे महंगी ब्रांड कार मेरे गैरेज में पड़ी है।  लेकिन मुझे व्हीलचेयर में बैठना होगा।

 ।

 2. मेरा घर हर तरह के डिजाइन के कपड़े, जूते, महंगी चीजों से भरा है।  लेकिन मेरा शरीर अस्पताल द्वारा प्रदान की गई एक छोटी सी चादर में ढका हुआ है।

 ।

 3. बैंक का पैसा मेरा पैसा है।  लेकिन वह पैसा अब मेरे किसी काम का नहीं है।

 ।

 4. मेरा घर एक महल की तरह है लेकिन मैं अस्पताल में एक जुड़वां आकार के बिस्तर पर लेटी हूं।

 ।

 5. मैं एक फाइव स्टार होटल से दूसरे फाइव स्टार होटल में जाती थी ।  लेकिन अब मैं अपना समय अस्पताल में एक प्रयोगशाला से दूसरे में जाने में लगा रही हूं।

 ।

 6. मैंने सैकड़ों लोगों को ऑटोग्राफ दिया है - और आज डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन मेरा ऑटोग्राफ है।

 ।

 6. मेरे बालों को सजाने के लिए मेरे पास सात ब्यूटीशियन थे - आज मेरे सिर पर एक भी बाल नहीं है।

 ।

 6. एक निजी जेट में, मैं जहां चाहे उड़ सकती थी ।  लेकिन अब मुझे अस्पताल के बरामदे में जाने के लिए दो लोगों की मदद लेनी होगी।

 ।

 9. हालांकि दुनिया भर में कई खाद्य पदार्थ हैं, मेरा आहार दिन में दो गोलियां और रात में खारा कुछ बूँदें हैं।


 यह घर, यह कार, यह जेट, यह फर्नीचर, इतने सारे बैंक खाते, इतनी प्रतिष्ठा और इतनी प्रसिद्धि, इनमें से कोई भी मेरे लिए किसी काम का नहीं है।  इसमें से कोई भी मुझे थोड़ा आराम नहीं दे सकता।


 यह केवल दे सकता है - कुछ प्यारे लोगों के चेहरे, और उनका स्पर्श। "

 मृत्यु से अधिक सत्य कुछ भी नहीं है।

 😭😭😭😭

बुधवार, 16 सितंबर 2020

उत्तराखंडखौफ़: कोरोना की सच्ची, फर्जी रिपोर्ट के ख़ौफ़ में जी रहा इंसान, आखिर किस रिपोर्ट पर यकीन करें

 

देहरादून। कोरोना की रिपोर्टों के सत्यापन में अब इंसान जीने लगा है। दरअसल, किसी की रिपोर्ट पॉजिटिव तो किसी की नेगेटिव अब इस संशय में इंसान करे भी तो क्या, आखिर किसकी रिपोर्ट पर यकीन करें



राजस्थान के सांसद हनुमान बेनीवाल की भी दिल्ली में संसद सत्र से पहले कोरोना जांच करवाई गयी तो वे पॉजिटिव आए। सांसद दिल्ली से लौट गए लेकिन उन्होंने सोचा कि एक बार ओर कोविड जाँच करवा लेते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार गजेंद्र रावत की एक पोस्ट में लिखा गया है कि, कल लगभग 30 सांसदों के कोरोना पॉजिटिव होने की बात चर्चा में आई थी।

इसके बाद सांसद बेनीवाल ने जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में कोरोना टेस्ट करवाया तो वो नेगेटिव आया।
अब वो पूछ रहे है कि बताइये किसको सही माना जाए ?

आप कहेंगें कि ये तो हो सकता है एकाध बार गलत रिपोर्ट भी आ जाती है ठीक है लेकिन इस पर क्या कहेंगे आप ?

अगस्त के मध्य में राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस इंद्रजीत मोहंती के कोरोना टेस्ट हुए, तीन दिन में जस्टिस मोहंती के छह टेस्ट किए गए। इनमें से दो की रिपोर्ट पॉज़िटिव आई, वहीं चार की रिपोर्ट नेगेटिव आई ।

बाद में जस्टिस मोहंती को कोविड 19 होने की आशंका के चलते राजस्थान हाईकोर्ट में तीन दिन की छुट्टी घोषित कर दी गयी, लेकिन यह स्पष्ट नही हुआ कि वे कोरोना पॉजिटिव थे या नही ?

ऐसे सैकड़ों मामले आए होंगे लेकिन चूंकि यह बड़े लोगो से जुड़ा मामला था इसलिए इस पर खबर छप गयी लेकिन पता नही ऐसे कितने लोगों की गलत रिपोर्ट बना दी गयी होगी। हाल ही में कई जगह पर ऐसे मामले सुनने को आ रहे हैं। जिनमे सरकारी रिपोर्ट पॉजिटिव और निजी लैब की रिपोर्ट नेगेटिव। ऐसे में इंसान किसकी रिपोर्ट पर यकीन करे।

इसके अलावा इंसान इसकी चपेट में है या नहीं लेकिन मानसिक स्तर पर जरूर बीमार हो रहा है। इसलिए उत्तराखण्ड टुडे आप सभी से यह अपील करता है कि कोरोना का डट कर सामना करें, घबराएं नही सावधानी का प्रयोग करें और WHO की गाइड लाइन का पालन करें।


शनिवार, 12 सितंबर 2020

शनिवार, 5 सितंबर 2020

'अपीलकर्ता और शिकायतकर्ता-महिला विवाह करने के लिए तैयार हैं', मध्य प्रदेश HC ने महिला से शादी करने के लिए अभियुक्त को 2 महीने की जमानत दी

'अपीलकर्ता और शिकायतकर्ता-महिला विवाह करने के लिए तैयार हैं', मध्य प्रदेश HC ने महिला से शादी करने के लिए अभियुक्त को 2 महीने की जमानत दी

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर खंडपीठ) ने बुधवार (02 सितंबर) को एक व्यक्ति (अपीलकर्ता) को अस्थायी तौर पर 2 महीने की जमानत दी, ताकि इस अवधि के दौरान अपीलकर्,ता अभियोजक पक्ष/शिकायतकर्ता-महिला के साथ विवाह कर सके।
न्यायमूर्ति एस. के. अवस्थी की पीठ अपीलार्थी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने न्यायाधीश देवास, जिला द्वारा दिनांकित 25.05.2020 के आदेश (Bail No.217/2020) से व्यथित महसूस होते हुए, SC / ST (PA) अधिनियम, 1989 की धारा 14-A (2) के तहत हाई कोर्ट के समक्ष अपील दायर की।

विशेष रूप से, अपीलकर्ता पर, अभियोजन पक्ष/पीड़ित महिला ने, उसके साथ बार-बार बलात्कार करने का आरोप लगाया गया था। ऐसा आरोप लगाया गया कि अपीलकर्ता के आग्रह पर, अभियोजन पक्ष ने अपने पति को भी तलाक दे दिया था और उसके बाद अपीलकर्ता उससे शादी करने के अपने वादे से पलट गया।

मामले की पृष्ठभूमि

अपीलार्थी को 12.02.2020 को, अपराध संख्या 13/2020 के तहत पुलिस स्टेशन सिटी कोतवाली, जिला देवास में आईपीसी की धारा 376 2 (एन), 506 और धारा 3(1) (W-II), 3(2)(V), 3(2)(V-a) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) 1989 के तहत दंडनीय अपराध के संबंध में गिरफ्तार किया गया था।

पक्षकारों की प्रस्तुतियाँ

अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, अभियोजक ने एक प्राथमिकी दर्ज की थी जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि अपीलकर्ता ने शादी के बहाने उसके साथ बलात्कार किया था।
अपीलकर्ता के वकील ने कहा कि वह निर्दोष है और उसे वर्तमान अपराध में झूठा फंसाया गया है। यह तर्क दिया गया कि अभियोजन पक्ष एक विवाहित महिला है।
अभियोजन पक्ष ने Cr.P.C की धारा 164 के तहत दर्ज अपने बयानों में अपीलकर्ता के खिलाफ आरोप लगाए। अपीलकर्ता के साथ उसका प्रेम संबंध था और उसने 15.02.2017 को पहले उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, उसके बाद वह नियमित रूप से उसके घर आने लगा और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता रहा।

अपीलकर्ता के आग्रह पर, उसने अपने पति को तलाक दे दिया और उसके बाद अपीलकर्ता ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया।

यह आगे प्रस्तुत किया गया कि अब दोनों पक्षों के परिवार के सदस्य दोनों की (अपीलकर्ता और पीड़ित महिला) शादी करने के लिए तैयार थे और इस संबंध में महिला ने न्यायालय के समक्ष एक हलफनामा भी दिया।

पूर्वोक्त को देखते हुए अपीलार्थी के वकील ने अपीलकर्ता को जमानत देने की प्रार्थना की।

कोर्ट का अवलोकन

अदालत ने अपने आदेश में कहा,
"इस तथ्य को देखते हुए कि अपीलकर्ता और अभियोजक बालिग़ हैं और अब वे विवाह करने के लिए तैयार हैं। इन परिस्थितियों में, वर्तमान अपील को अनुमति दी जाती है और अपीलकर्ता को उसकी रिहाई की तारीख से दो महीने की अवधि के लिए अस्थायी जमानत दी जाती है ताकि इस अवधि के दौरान अपीलकर्ता अभियोजन पक्ष के साथ विवाह कर सके।"

नतीजतन, निचली अदालत के आदेश को अलग करते हुए, अपील को भाग में अनुमति दी गई थी। यह निर्देश दिया गया था कि अपीलार्थी को 50,000 रुपये (केवल पचास हजार) के निजी मुचलके पर जमानत पर रिहा किया जाएगा, जो कि विचाराधीन ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के साथ होगा।

उसे 03.11.2020 को ट्रायल कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करना होगा और सीआरपीसी की धारा 437 (3) के तहत लागू की गई शर्तों का पालन भी करना होगा.

Download Sbi Gernal Insurance Policy

Dear VLE, 

Aapko Policy Download kerne koi problem ho rahi h to niche diye gaye link se download ker sakte h

Policy No fill kerke 
Dear All, if you have policy number then you can download pdf from this link    https://secure.sbigeneral.in/SBIGTP/M2W/PDF

Aapke sewa ke liye hardam aapke Sath🙏 
Jude Rahe SBI ke sath 
Suraksha aur Bharosha Dono👍

Octafx Copytrading

 I want to invite you to OctaFX Copytrading, so you could invest your funds in the Forex market, copy trades of experienced traders, and gain profit with them.

https://copytrade.page.link/Dzsf