️ प्रशासन️️ ️दुर्ग
Not a Love Story:हमारे यहाँ पैन कार्ड, जीवन प्रमाण पत्र, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे विभिन्न सहायक दस्तावेज बनाये जाते है | आय प्रमाणपत्र, निवास प्रमाण पत्र एवं जाति प्रमाण पत्र, खाद्य लाईनसेस जैसे प्रमाण पत्र कि ऑनलाईन सेवाएं प्रदान कि जाती है | ई-डिस्ट्रिक्ट सुविधा विवाह प्रमाण पत्र, गुमास्ता लाईसेंस, कि सेवा उपलब्ध है| इसके अलावा हमारे एहाँ राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार के विभिन्न दस्तावेज बनाने हेतु ऑनलाईन प्रोसेसिंग कार्य किए जाते हैं। Life Insurance. Motor insurance. Health insurance.
भारत में काम कर रही प्रमुख सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम की मुसीबत बढ़ती हुई दिखाई दे रही है. ऐसा माना जा रहा है कि अगले दो दिनों में इन ऐप्स पर बैन भी लग सकता है. दरअसल केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को फरवरी में कुछ नियमों का पालन करने का निर्देश दिया था. इसके लिए इन कंपनियों को सरकार की ओर से तीन महीने का समय दिया गया था जिसकी अवधि 26 मई को पूरी होने वाली है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक इंन सोशल मीडिया कंपनियों ने सरकार के नियमों का पालन नहीं किया है जिसके कारण ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले दो दिनों में इनकी सेवाओं को बंद भी किया जा सकता है.
,
केंद्र सरकार ने 25 फरवरी 2021 को भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय की तरफ से डिजिटल कंटेंट को रेग्यूलेट करने के लिए 3 महीने के भीतर कंप्लायंस अधिकारी, नोडल अधिकारी आदि को नियुक्त करने के लिए कहा गया था और इन सभी का कार्यक्षेत्र भारत में होना चाहिए था. लेकिन सूत्रों की मानें तो इन सोशल मीडिया जायंट्स ने अब तक इन नियमों को लागू नहीं किया है. सूत्रों का कहना है कि जो भी कंपनी इन नियमों का पालन करने में फेल होती है उनके इंटरमीडियरी स्टेटस को खत्म किया जा सकता है और उन पर आपराधिक कार्रवाई भी की जा सकती है.
सूत्रों ने यह भी कहा कि, “हालांकि वे एक इंटरमीडियरी होने के संरक्षण का दावा करते हैं, लेकिन वे भारतीय संविधान और कानूनों के संदर्भ के बिना अपने स्वयं के मानदंडों के माध्यम से कंटेंट को मॉडिफाई करने और निर्णय लेने के लिए अपने नियमों का पालन करते हैं.
कंपनियों को मानना होगा ये नियम
कार्यालय के आदेश के अनुसार, रचना के लिए उपयुक्त वातावरण और संरचना के प्रकार के अनुसार भारत का स्थान होगा, स्थिति, स्थिति, स्थिति, स्थिति, स्थिति परिवर्तन, कंप्लायंस संरचना और फ़ॉर्मैटर मैटेरियल को फ़ॉर्मेट में बदलने के लिए उपयुक्त स्थान पर लागू होता है।. . . . . . . . . . . . तो .. . . . . . . तब बल्कि किसी भी प्रकार के वातावरण में परिवर्तित होने के लिए उपयुक्त वातावरण का निर्माण होगा। ) । इस समय के लागू होने के समय, टाइम्स ऑफ इंडिया के क्षेत्र में दांव लगाने वाले, एक्सटर्नल अफेयर्स, होम टैग्स, लाईट, वाइट, और वूमेन और वूमेन वाइट विंग के विंग के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। डब्लू डब्लू डब्लू डब्लू डब्लू डब्लू डब्लू डब्लू पास
️ लागू होने पर कोई भी काम करता है, तो उसे लागू होने वाले बॉक्सिंग ब्लॉक्स के लिए सामग्री को सरकारी अधिकारी द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
कहती️ कहती️ कहती️️️️️
25 फरवरी 2021 को भारत सरकार के एमईआईटीवाई ने सभी सामाजिक समय को इन कीटाणुओं को खत्म करने के लिए कहा। जब भी ऐसा किया जाता है तो वे ऐसा करते हैं। वैट ने कहा कि भारत में ये समान हैं। कहती️️️️️️️️️️️️️️️️ है है है कि खुद की जांच करने वाले की जांच की है। ट्विट सोशल मिडिया पर चलने वाला व्यक्ति इस बात की जानकारी नहीं है।
हजारों साल पहले मगध जनपद के एक निकटवर्ती वन में हजार हिरणों का एक समूह रहता था जिसके राजा के दो पुत्र थे- लक्खण और काल। जब मृगराज वृद्ध होने लगा तो उसने अपने दोनों पुत्रों को उत्तराधिकारी घोषित किया और प्रत्येक के संरक्षण में पाँच-पाँच सौ मृग प्रदान किए ताकि वे सुरक्षित आहार-विहार का आनंद प्राप्त कर सकें।
उन्हीं दिनों फसल काटने का समय भी निकट था तथा मगधवासी अपने लहलहाते खेतों को आवारा पशुओं से सुरक्षित रखने के लिए अनेक प्रकार के उपक्रम और खाइयों का निर्माण कर रहे थे। मृगों की सुरक्षा के लिए वृद्ध पिता ने अपने दोनों पुत्रों को अपने मृग-समूहों को लेकर किसी सुदूर और सुरक्षित पहाड़ी पर जाने का निर्देश दिया।
काला एक स्वेच्छाचारी मृग था। वह तत्काल अपने मृगों को लेकर पहाड़ी की ओर प्रस्थान कर गया। उसने इस बात की तनिक भी परवाह नहीं की कि लोग सूरज की रोशनी में उनका शिकार भी कर सकते थे। फलत: रास्ते में ही उसके कई साथी मारे गये।
लक्खण एक बुद्धिमान और प्रबुद्ध मृग था। उसे यह ज्ञान था कि मगधवासी दिन के उजाले में उनका शिकार भी कर सकते थे। अत: उसने पिता द्वारा निर्दिष्ट पहाड़ी के लिए रात के अंधेरे में प्रस्थान किया। उसकी इस बुद्धिमानी से उसके सभी साथी सुरक्षित पहाड़ी पर पहुँच गए।
चार महीनों के बाद जब लोगों ने फसल काट ली तो दोनों ही मृग-बन्धु अपने-अपने अनुचरों के साथ अपने निवास-स्थान को लौट आये। जब वृद्ध पिता ने लक्खण के सारे साथियों को जीवित और काला के अनेक साथियों के मारे जाने का कारण जाना तो उसने खुले दिल से लक्खण की बुद्धिमत्ता की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
Insurance क्यों लेनी चाहिये,
एक बार जरूर पढ़े...
आप कहते है। मुझे बीमे की जरुरत नहीं
🌷1. बीमे की जरुरत आपको नहीं आपके परिवार को है।
🌷2. बीमा तभी लिया जाता है, जब उसकी जरुरत नहीं हो, जरुरत होने पर बीमा नहीं मिलता, इसके लिए स्वास्थ्य होना जरुरी है।
🌷3. यदि आपके पास सोने का अंडा देनेवाली मुर्गी हो तो आप किसका बीमा करवायेंगे। मुर्गी का या अंडे का.. आप अपनी कार का बीमा करवाते है क्या इससे आपका परिवार सुरक्षित रहता है?
🌷4. कार में चार पहिये होते है फिर भी पांचवा रखना जरुरी क्यों है रास्ते में सुरक्षा के लिये या फालतू खर्च?
🌷5. बच्चा असफल हो जाये तो दुबारा मौका मिल सकता है, पर पिताजी असफल हो जाये तो बच्चों का भविष्य ख़राब हो सकता है।
🌷6. बीमे की प्रिमियम देखने से ज्यादा जरुरी आपात स्थिति में मिलने वाली राशि को देखना चाहिये।
🌷7. क्या आपको मालुम है कि आपका जीवन आपके परिवार के लिये कितना अमूल्य व आवश्यक है आप ही बच्चों की शिक्षा तथा विवाह का प्रबंध करेंगे।
🌷8. क्या आपने अपनी सभी पॉलिसियों में नामांकन करवा रखा है?
🌷9. जब आप एक महीने के लिए घर से बाहर जाते है तो क्या क्या व्यवस्था करके जाते है?
🌷10. जब भीड़ में आपका बच्चा आपसे बिछड़ जाता है तो उसे कितनी परेशानी तथा दर्द होता है ?
🌷11. आपके बाहर जाने पर कितने दिनों तक रिश्तेदार आपके परिवार की मदद कर सकते है?
🌷12. यदि आप अपने शौक या विलासिता पर खर्च करते है बदले में कुछ नहीं मिलता परंतु यहाँ आपके परिवार की सुरक्षा की जाती है फिर भी आप कह रहे है आपको बीमे की आवश्यकता नहीं।
🌷13. एकबार अपना बेटा या बीबी बनकर विचार कीजिये।
🌷14. बीमा अपने फायदे के लिए नहीं अपने परिवार की सुरक्षा के लिए ख़रीदा जाता है जिस प्रकार छाता बारिश रोकने के लिए नहीं। छाता तो बारिश में भीगने से बचने के लिए ख़रीदा जाता है।
🌷15. प्रायः लोगो के पास उनकी सालाना आय के 10 गुना से कम Insurance होती है, क्या आप ऐसे लोगो मे शामिल तो नहीं ??
निर्णय आपका है..
क्योंकि परिवार भी आपका है, मेरा काम आपको बीमे के बारे में बताना है करवाना या ना करवाना आपकी अपनी सोच है!!
अब तक के मीडिया संस्थान 15 अरब, एफपीओ के बारे में अरब...
आमदनी बढ़ाने के लिए मोदी सरकार इस तरह से शुरू करें। बजट में कृषि और कृषि (भारतीय किसान) को आगे बढ़ाने के लिए समूह को 15-15 लाख अरब अरब डॉलर की आर्थिक सहायता प्रदान करें
नई दिल्ली. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Government of India) अब किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए नई पहल शुरू करने जा रही है. बजट में की गई घोषणा के तहत किसान और कृषि (Indian Farmers) को आगे बढ़ाने के लिए उनके ग्रुप को 15-15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी. इसके लिए उन्हें एक कंपनी बनानी यानी किसान उत्पादक संगठन (FPO-Farmer Producer Organisation) बनाना होगा. आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) आज PM-किसान (PM-Kisan) योजना के एक साल पूरे होने के अवसर पर चित्रकूट से देशभर में 10 हजार किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की शुरुआत करेंगे. इस बारे में PM मोदी ने ट्वीट किया है और केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने भी इस बारे में जानकारी दी थी. PM मोदी ने कहा कि एफपीओ से किसानों को तकनीकी, वित्तीय सहयोग एवं बाजार पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
सरकार ने 10,000 नए किसान उत्पादक संगठन बनाने की मंजूरी दे दी है. अगले 5 साल में इस पर 4,496 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसका रजिस्ट्रेशन कंपनी एक्ट में ही होगा, इसलिए इसमें वही सारे फायदे मिलेंगे जो एक कंपनी को मिलते हैं. यह संगठन कॉपरेटिव पॉलिटिक्स से बिल्कुल अलग होंगे यानी इन कंपनियों पर कॉपरेटिव एक्ट नहीं लागू होगा.
modi government farmer scheme, मोदी सरकार की किसान स्कीम, farmers can get 15 lakh rupees, किसान ले सकते हैं 15 लाख रुपये, What is FPO, क्या होता है एफपीओ, How to get 15 lakh rupees, कैसे मिलेंगे 15 लाख रुपये, NABARD, नाबार्ड, ministry of agriculture, कृषि मंत्रालय, farmer producer organization, किसान उत्पादक संगठन, कंपनी एक्ट, Companies Act, kisan
पीएम ने किसानोंं को दी सौगात
सवाल- क्या होता है किसान उत्पादक संगठन (FPO-Farmer Producer Organisation)
जवाब- एफपीओ एक किसानों का संगठन होता है. इसमें खेती करने वाले सभी किसान शामिल होते है. उदाहरण तौर पर समझें तो एएपीओ को एक कंपनी माना जाता है. ये जितनी कमाई करती है उसे सभी किसानों में बराबर बांट दिया जाता है. ये संगठन किसानों को सस्ता कर्ज, बेहतर उपकरण और कई अन्य सॉर्स के जरिए आय बढ़ाने में मदद करते है.
एफपीओ लघु और सीमांत किसानों का एक समूह होगा, जिससे उससे जुड़े किसानों को न सिर्फ अपनी उपज का बाजार मिलेगा बल्कि खाद, बीज, दवाइयों और कृषि उपकरण आदि खरीदना आसान होगा. सेवाएं सस्ती मिलेंगी और बिचौलियों के मकड़जाल से मुक्ति मिलेगी.
अगर अकेला किसान अपनी पैदावार बेचने जाता है, तो उसका मुनाफा बिचौलियों को मिलता है. एफपीओ सिस्टम में किसान को उसके उत्पाद के भाव अच्छे मिलते हैं, क्योंकि बारगेनिंग कलेक्टिव होगी.
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुताबिक ये 10,000 नए एफपीओ 2019-20 से लेकर 2023-24 तक बनाए जाएंगे. इससे किसानों की सामूहिक शक्ति बढ़ेगी.
सवाल- FPO के क्या फायदे होते है?
जवाब- छोटे और सीमांत किसानों की संख्या लगभग 86 फीसदी है, जिनके पास देश में 1.1 हेक्टेयर से कम औसत खेती है. इन छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को कृषि उत्पादन के दौरान भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इन किसानों को अपनी आर्थिक कमजोरी के कारण अपने उत्पादों की मार्केटिंग की चुनौती का भी सामना करना पड़ता है.
बयान में कहा गया है कि FPO से छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों के सामूहीकरण में सहायता होगी ताकि इन मुद्दों से निपटने में किसानों की सामूहिक शक्ति बढ़ सकें. एफपीओ के सदस्य संगठन के तहत अपनी गतिविधियों का प्रबंधन कर सकेंगे ताकि प्रौद्योगिकी, निवेश, वित्त और बाजार तक बेहतर पहुंच हो सके और उनकी आमदनी तेजी से बढ़ सके.
सवाल- कैसे मिलेंगे 15 लाख रुपये (What are Farmer Producer Organisations)?
जवाब-राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य विनोद आनंद ने बताया कि सबसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने एफपीओ बनाने के लिए जाने माने अर्थशास्त्री डॉ वाईके अलघ के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई थी. इसके तहत कम से 11 किसान संगठित होकर अपनी एग्रीकल्चर कंपनी या संगठन बना सकते हैं. मोदी सरकार जो 15 लाख रुपये देने की बात कर रही है उसका फायदा कंपनी का काम देखकर तीन साल में दिया जाएगा.
हर उत्पादक संगठन को 15 लाख की आर्थिक मदद मिलेगी
सवाल- सरकार इसे कैसे आगे बढ़ाएगी?
सरकार की ओर से साझा किए गए को साझा किया गया था। इन वाई-फाईनेटिंग जो भी खराब होगी, वह... इस तरह के किसी भी निगम के संचार को बढ़ाने के लिए इस तरह के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए। एक अधिकारी के रूप में लिखा गया है कि स्टेट वर्ड, नाबार्ड, स्मॉल प्लोर फार्मर्स कॉन्स्ट्रक्ट के साथ काम करता है। हं में कुल 822 को बार, स्कली ने प्र मोट मोट 2,154 एफ ने ️️️️️️️️️
रायपुर। अपने परीक्षा परिणाम का इंतजार कर रहे विद्यार्थियों का अब इंतजार खत्म होने वाला है। प्रदेश में कोरोना महामारी के बीच 19 मई यानी कल 10वीं बोर्ड के परिणाम घोषित किए जाएंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम सुबह 11 बजे 10वीं बोर्ड के रिजल्ट जारी करेंगे।
प्रदेश में बिना परीक्षा दिए असाइंमेंट के आधार पर छात्रों को पास किया जाएगा।
इससे पहले कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने परीक्षा को रद्द कर दिया था।
रिजल्ट का इंतजार कर रहे विद्यार्थियों का अब इंतजार खत्म हो जायेगा।
ll #स्नेह_के_आँसू ll
गली से गुजरते हुए सब्जी वाले ने तीसरी मंजिल की घंटी का बटन दबाया। ऊपर से बालकनी का दरवाजा खोलकर बाहर आई महिला ने नीचे देखा।
"बीबी जी ! सब्जी ले लो । बताओ क्या- क्या तोलना है। कई दिनों से आपने सब्जी नहीं खरीदी मुझसे, कोई और देकर जा रहा है?"
सब्जी वाले ने चिल्लाकर कहा।
"रुको भैया! मैं नीचे आती हूँ।"
उसके बाद महिला घर से नीचे उतर कर आई और सब्जी वाले के पास आकर बोली -
"भैया ! तुम हमारी घंटी मत बजाया करो। हमें सब्जी की जरूरत नहीं है।"
"कैसी बात कर रही हैं बीबी जी ! सब्जी खाना तो सेहत के लिए बहुत जरूरी होता है। किसी और से लेती हो क्या सब्जी ?"
सब्जीवाले ने कहा।
"नहीं भैया! उनके पास अब कोई काम नहीं है। और किसी तरह से हम लोग अपने आप को जिंदा रखे हुए हैं। जब सब ठीक होने लग जाएगा, घर में कुछ पैसे आएंगे, तो तुमसे ही सब्जी लिया करूंगी। मैं किसी और से सब्जी नहीं खरीदती हूँ। तुम घंटी बजाते हो तो उन्हें बहुत बुरा लगता है, उन्हें अपनी मजबूरी पर गुस्सा आने लगता है। इसलिए भैया अब तुम हमारी घंटी मत बजाया करो।"
महिला कहकर अपने घर में वापिस जाने लगी।
"ओ बहन जी ! तनिक रुक जाओ। हम इतने बरस से तुमको सब्जी दे रहे हैं । जब तुम्हारे अच्छे दिन थे, तब तुमने हमसे खूब सब्जी और फल लिए थे। अब अगर थोड़ी-सी परेशानी आ गई है, तो क्या हम तुमको ऐसे ही छोड़ देंगे ? सब्जी वाले हैं, कोई नेता जी तो है नहीं कि वादा करके छोड़ दें। रुके रहो दो मिनिट।"
और सब्जी वाले ने एक थैली के अंदर टमाटर , आलू, प्याज, घीया, कद्दू और करेले डालने के बाद धनिया और मिर्च भी उसमें डाल दिया । महिला हैरान थी। उसने तुरंत कहा –
"भैया ! तुम मुझे उधार सब्जी दे रहे हो, कम से कम तोल तो लेते, और मुझे पैसे भी बता दो। मैं तुम्हारा हिसाब लिख लूंगी। जब सब ठीक हो जाएगा तो तुम्हें तुम्हारे पैसे वापस कर दूंगी।" महिला ने कहा।
"वाह..... ये क्या बात हुई भला ? तोला तो इसलिए नहीं है कि कोई मामा अपने भांजी -भाँजे से पैसे नहीं लेता है। और बहिन ! मैं कोई अहसान भी नहीं कर रहा हूँ । ये सब तो यहीं से कमाया है, इसमें तुम्हारा हिस्सा भी है। गुड़िया के लिए ये आम रख रहा हूँ, और भाँजे के लिए मौसमी । बच्चों का खूब ख्याल रखना। ये बीमारी बहुत बुरी है। और आखिरी बात सुन लो .... घंटी तो मैं जब भी आऊँगा, जरूर बजाऊँगा।"
और सब्जी वाले ने मुस्कुराते हुए दोनों थैलियाँ महिला के हाथ में थमा दीं।
अब महिला की आँखें मजबूरी की जगह स्नेह के आंसुओं से भरी हुईं थीं।
(नि:शब्द ) copy
कार्यालय कलेक्टर से जारी आदेश के कंडिका 3 अनुसार जिले में चॉइस एवंम csc सेंटर का कार्य प्रारंभ किये जाने का निर्देश प्रदाय किया गया, समस्त operator निम्न निर्देशो का पालन कर सेंटर ओपन करना सुनिस्चित करेंगे:-
1) social distancing का पालन करना एवं हितग्राहियों से पालन करवाना सुनिश्चित करे , इस हेतु कार्यालय के बाहर चॉक से 2 गज के दूरी के अंतराल में गोला बनाना सुनिश्चित करे ।।।
2)हैंड वाश की सुविधा, इस हेतु सेंटर में handsoap और पानी की व्यस्वस्था किया जाना सुनिश्चित करे ।।
3) सेंटर में सैनिटाइजर की सुविधा।।
4) साफ सफाई का ध्यान रखे ।।
5)अतिआवश्यक डबल मास्क लगा कर ही कार्यालय पहुचे साथ ही कार्यालय में उपस्थित होना सुनिश्चित करे।
उपरोक्त समस्त निर्देशो का पालन करते हुए समय सुबह 10:30 बजे से शाम 05:00बजे तक कार्यालय ओपन कर कार्य किया जाना सुनिश्चित करे ।।।
समस्त तैयारी के साथ ही कार्यालय पहुचना सुनिश्चित करेंगे ।।।
आदेशासनुसार ।।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्य सरकारों को सेक्स वर्करों को भी राशन कार्ड बना कर राशन उपलब्ध कराने का आदेश जारी किया था। कई राज्यों ने इस पर अमल भी शुरू किया, लेकिन कुछ राज्यों में स्थिति अभी भी सुधरी नहीं है। कोरोना की दूसरी लहर में सेक्स वर्करों को राशन ठीक से राशन नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में यूपी, बिहार, झारखंड, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली सहित देश के सभी राज्य और केंद्र शसित प्रदेशों को सेक्स वर्करों के लिए विशेष इंतजाम करने की हिदायत दी गई है।
अब फ्री में राशन ले सकते हैं सेक्स वर्कर्स
देश के सभी राज्य सरकारें इन सेक्स वर्करों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन मुहैया कराएगी। सेक्स वर्करों को इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीका विकल्प दिया गया है। राज्य सरकारों ने जिला प्रशासन को इसके लिए स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। बता दें कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सेक्स वर्करों की पहचान और पते को गोपनीय रखा जाएगा।